विंग कमांडर अभिनन्दन की तरह पहले भी दो जवान सीमा पार कर वापस आ चुके हैं

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शिखा कौशिक/

दो दिन के उठा-पटक के बाद आखिरकार आज  पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान को रिहा कर रहा है. अभिनन्दन को बुधवार को पकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था जब वह एक पाकिस्तानी विमान को खदेड़ते हुए पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे.

बुधवार को भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया कि उनका एक पायलट गायब है. सूचना के अनुसार जब पाकिस्तानी हमलावरों ने अपने पीएएफ-16 विमान से भारतीय सीमा पर हमला किया तो बड़ी बहादूरी के साथ भारतीय वायु सेना के जवानों ने उनको पीछे धकेला. पाकिस्तानी विमान को वापस खदेड़ने के प्रयास में वे भी अपने विमान के साथ नियंत्रण रेखा के उस पार चले गए. पाकिस्तान ने कई विडियो जारी किये हैं. एक विडियो में अभिनन्दन को यह बोलते सुना जा सकता है, “मेरा नाम विंग कमांडर अभिनन्दन है. मेरा सर्विस नंबर 27981 है. मैं एक पायलट हूँ. मैं हिन्दू धर्म से हूँ.”

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित कुछ खबरों की मानें तो अभिनन्दन को पहले स्थानीय लोगों ने पकड़ा जब वह अपने विमान में आग लगने के बाद पैराशूट से नीचे कूदे. पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि इन्हीं लोगों ने अभिनन्दन को स्थानीय लोगों की गिरफ्त से छुडाया. भारत सरकार ने विंग कमांडर अभिनन्दन से जुड़े विडियो सोशल मीडिया पर जारी करने के लिए पाकिस्तान को निंदा की है. भारत सरकार ने जेनेवा कन्वेंशन के तहत पाकिस्तान से अभिनन्दन के फ़ौरन रिहाई की मांग की थी.

लेकिन ये  पहली बार नहीं है जब भारत के किसी जवान की युद्ध के दौरान सीमा पार करने के बाद रिहाई हो रही है. विंग कमांडर अभिनन्दन की ही तरह पहले भी युद्ध के दौरान भारत के दो जवान पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं और उनकी सफल रिहाई भी हुई है.

सबसे हालिया उदाहरण हैं कमाम्पति नचिकेता जो कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए. यह सन्1999 की बात है. नचिकेता कारगिल युद्ध के समय फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे. 27 मई 1999 को नचिकेता पाकिस्तानी पोस्ट पर हवाई हमले में व्यस्त थे. जगह थी बटालिक सेक्टर और विमान था मिग-27. विमान का इंजन फेल हुआ और नचिकेता को नीचे उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा. जमीन पर उतरते हुए नचिकेता ने पाकिस्तानी सेना पर हमला जारी रखी. नचिकेता को गिरफ्तार कर रावलपिंडी ले जाया गया और ऐसा माना जाता है कि उनको वहाँ प्रताड़ित किया गया. कहते हैं कि कुछ सीनियर अधिकारियों ने तब हस्तक्षेप किया, जब उन्हें जेनेवा कन्वेंशन की बात बताई गई.

आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय दबाव के पाकिस्तान को झुकना पड़ा और नचिकेता को 3 जून 1999 को छोड़ना पड़ा. उन्हें रेड क्रॉस के अंतर्राष्ट्रीय समिति के माध्यम से छोड़ा गया. इसके बाद वो वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत आये थे. सन् 2000 में नचिकेता को वायु सेना मेडल से नवाजा भी गया.

इसके पहले 1965 के युद्ध के दौरान भी भारत का एक जवान पाकिस्तानी की सीमा में प्रवेश कर गया था. भारत और पाकिस्तान के युद्ध के बीच के नंदा करिअप्पा जो उस समय 26 साल के थे, को पाकिस्तान ने पकड़ लिया था. उस समय उन्हें भी उनका हॉकर हंटर विमान जमीन पर उतरना पड़ा था. उन्हें आठ सप्ताह तक जेल में रखा गया और उसके बाद जेनेवा संधि के तहत वैसे कैंप में ले जाया गया जहां प्रिजनर ऑफ़ वार के लिए जगह बनाई गई थी.

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