क्या आज अर्थशास्त्र के नोबेल में रघुराम राजन बाज़ी मारेंगे!

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सौतुक डेस्क/

आज अर्थशास्त्र के लिए नोबेल मिलना तय है. बहुत संभव है कि आज भारतीय नागरिकों के लिए गौरव क्षण आये. इसकी वजह है भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के नाम का उस नोबेल पुरस्कार के दावेदारों की सूची में शामिल होना.

क्लारिवेट एनालिटिक्स के द्वारा तैयार सूची में रघुराम राजन का नाम शामिल है. यह संस्था अकादमिक और वैज्ञानिक शोध का कार्य करती है और हर साल ऐसे संभावित विशेषज्ञों के नाम की सूची तैयार करती है जिनको इस साल का नोबेल मिल सकता है. यह इन विशेषज्ञों के कार्य के आधार पर किया जाता है.

इस संस्था के दावे के अनुसार पिछले पंद्रह सालों में इसकी भविष्यवाणी किये हुए नामों में से 45 विशेषज्ञों को नोबेल मिल चुका है. बल्कि, उनमें से नौ को तो उसी साल मिल गया जब इन्होंने ये भविष्यवाणी की और 18 लोगों को भविष्यवाणी के दो साल के भीतर नोबेल मिल गया.

राजन उन छः आर्थिक विशेषज्ञों में शामिल हैं जो इस बार इस संस्था की सूची में शामिल हैं. अपने कॉर्पोरेट फाइनेंस के कार्य के लिए राजन का नाम इस सूची में शामिल किया गया है. जिसकी घोषणा आज यानि 9 अक्टूबर को होना तय है.

राजन का तीन साल का भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर का कार्यकाल 4 सितम्बर, 2016 को समाप्त हुआ. वर्तमान में राजन यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो में कार्यरत हैं.

महज चालीस की उम्र में राजन इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड में मुख्य इकोनॉमिस्ट बन गए थे. यह एक रिकॉर्ड है. राजन तब चर्चा में आये जब उन्होंने 2005 में, अमेरिका में आयोजित आर्थिक विशेषज्ञों और बैंकरों के वार्षिक सम्मलेन में एक परचा पढ़ा था जिसमें उन्होंने संभावित आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी की थी. यह परचा उन्होंने 2005 में पढ़ा था और 2008 आते-आते विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा था.

सनद रहे कि 2005 में उनके परचे और भविष्यवाणी को गंभीरता से नहीं लिया गया था लेकिन 2008 में अमेरिका से शुरू हुई आर्थिक मंदी पूरे विश्व में छा गयी.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहते हुए भारत सरकार और उनके बीच के संबंधों में आखिरी समय में काफी खटास आ गयी थी.  राजन अपने लिए दूसरा कार्यकाल चाहते थे लेकिन भारत सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी. वो मुद्दे जिनपर उनके और भारत सरकार के बीच सहमति नहीं थी उनमे नोटबंदी भी शामिल था.

 

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