क्या फर्जी मतदाताओं के बल पर लड़ा जाएगा मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव?

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संदीप पौराणिक/

अभी हाल में कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में 60 लाख के करीब फर्जी मतदाता होने की खबर से चुनाव आयोग को अवगत कराया. लेकिन यह इतनी नई समस्या नहीं हैं. एक बार में तो ऐसा प्रतीत होता है कि मध्य प्रदेश का चुनाव सर पर है और उसके बाबत तैयारी हो रही है. इसी दरम्यान इन फर्जी मतदाताओं की जानकारी हाथ लगी है. लेकिन ऐसा नहीं है.

इसी साल फ़रवरी महीने में शिवपुरी जिले में बड़े स्तर पर फर्जी मतदाता होने की बात सामने आई थी. यह तब हुआ था जब शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली में विधानसभा का उपचुनाव हो रहा था. हाल ही में 9 मई को मीडिया ने सिर्फ शिवपुरी जिले में 60 हज़ार के करीब फर्जी मतदाता होने के बारे में खुलासा किया था. इन फर्जी मतदाताओं की सूची में इक्कीस हज़ार तो ऐसे थे जिनकी वर्षों पहले मौत हो चुकी थी.

आईएएनएस की खबर के मुताबिक़ इस सूची में 28,067 मतदाता ऐसे हैं, जो दूसरी जगह चले गए. पर सूची में उनके नाम अब भी मौजूद हैं. जिले में अपने स्थान पर अनुपस्थित पाए गए मतदाताओं की संख्या 5,633, और एक से ज्यादा स्थानों पर 5,031 मतदाताओं के नाम पाए गए थे.
आखिर इसकी जानकारी होने के बाद भी चुनाव आयोग क्यों सोया हुआ है? अगर चुनाव आयोग चाहे तो इसके लिए जिम्मेदार शख्स तक पहुंचना कोई बड़ी बात नहीं हैं. जब फरवरी माह में कोलारस विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी यह बात सामने आई थी कि 5,537 मृत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में मौजूद थे, उस समय शिवपुरी के तत्कालीन जिलाधिकारी तरुण राठी को इस मामले में चुनाव आयोग ने लापरवाही का दोषी पाया था.

आयोग ने जांच में पाया था कि जिलाधिकारी तरुण राठी ने सूची में गड़बड़ी पर सही मॉनिटरिंग नहीं की. इसके बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह को पत्र भी लिखा था. बाद में राठी का तबादला कर दिया गया.

ऐसे में सवाल उठा कि जब शिवपुरी जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में 60,000 फर्जी मतदाता अर्थात औसतन एक विधानसभा में 12,000 फर्जी मतदाता हो सकते हैं, तो प्रदेश के 230 विधानसभा क्षेत्रों का क्या हाल होगा. इसी आधार पर कांग्रेस ने विधानसभा की 100 सीटों पर मतदाताओं की स्थिति का पता लगाया, जिसमें औसत तौर पर एक बात सामने आई कि राज्य में 6000,000 फर्जी मतदाता हैं. एक मतदाता की 10 से 20 मतदान केंद्रों की सूची में नाम और तस्वीरें हैं.

एक मतदाता की 10 से 20 मतदान केंद्रों की सूची में नाम और तस्वीरें हैं.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग को शिकायत की, जिस पर जांच भी शुरू हो गई है. आयोग ने एक जांच दल भोपाल भी भेजे हैं.

राज्य की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह का कहना है, “जो हुआ है वह नहीं होना चाहिए. इसमें सुधार के लिए हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. जिला स्तर पर ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही है, जिसके जरिए एक ही तस्वीर कई स्थानों पर पाए जाने पर उन्हें हटाया जाए. हमारी सबसे मजबूत कड़ी ब्लॉक स्तर का अधिकारी होता है, वह अच्छा काम करेगा, कलेक्टर उस पर निगरानी अच्छे से रखेंगे तो तस्वीरों का दोहराव नहीं होगा.”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह चौहान ने पिछले दिनों चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि भोपाल जिले के नरेला विधानसभा क्षेत्र में कई मकान ऐसे हैं, जिनका आकार 1550 से 2000 वर्ग फुट है और वहां 100 से 150 तक मतदाता होना बताया गया है.

राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता का मसला काफी अहम रहने वाला है, क्योंकि 230 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 50 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां जीत हार का अंतर अधिकतम 5,000 रहता है. इस स्थिति में अगर फर्जी मतदाताओं के नाम काट दिए गए और उनके स्थान पर कोई वोट नहीं डाल पाया तो नतीजे चुनावी तस्वीर बदलने वाले साबित हो सकते हैं.

–आईएएनएस

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