महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने को लेकर कांग्रेस और भाजपा कब आगे कदम बढ़ाएंगे!

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उमंग कुमार/

राजनितिक दलों के लिए अब महिलाओं को नज़रअंदाज करना मुश्किल होगा. यह तो तय है. लेकिन क्या दो बड़े राजनितिक दल कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी इसकी अगुवाई करेंगे या हमेशा की तरह इस बार भी गच्चा देंगे!

बतौर मतदाता, महिलाओं ने अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराना शुरू कर दिया है और अब पुरुषों के बाराबर बूथ पर वोट देने को मौजूद होती हैं. 16 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में, महिला मतदाताओं की संख्या कमोबेश पुरुष मतदाताओं के बराबर रही.

राजनितिक दलों ने इस दस्तक को महसूस करना शुरू कर दिया है और उन्हें लगने लगा है कि अब महिलाओं को नज़रअंदाज करके किसी भी चुनाव में बढ़त नहीं ली जा सकती.

जैसे कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देंगे. कांग्रेस से कई कदम आगे बढ़ते हुए, उड़ीसा में नवीन पटनायक के नेतृत्त्व में बीजू जनता दल ने  लोकसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा कर दी है. यह इसी लोकसभा चुनाव से शुरू हो चुका है. इसी तरह पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस ने जारी उम्मीदवारों की सूची में 41 प्रतिशत महिलायें हैं.

वर्ष 2019 में प्रकाशित सूची में, भारत कुल 193 देशों के बीच 149 वें पायदान पर था. यह सूची संसद में महिलाओं की उपस्थिति को लेकर बनाई गई थी. भारत इस सूची में पड़ोसी मुल्क जैसे पाकिस्तानबांग्लादेश और अफगानिस्तान से भी पीछे था

वर्तमान स्थिति के मद्देनज़र ये सारे कदम स्वागत योग्य हैं. क्योंकि वर्तमान में प्रतिनिधि के तौर पर महिलाओं की जो स्थिति है वह कहीं से इस बात की पुष्टि नहीं करता कि भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मानजनक स्थान प्राप्त है.

जैसे वर्ष 2019 में प्रकाशित सूची में, भारत कुल 193 देशों के बीच 149 वें पायदान पर था. यह सूची संसद में महिलाओं की उपस्थिति को लेकर बनाई गई थी. भारत इस सूची में पड़ोसी मुल्क जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भी पीछे था.

वर्तमान में लोकसभा में कुल 66 महिला सांसद हैं जबकि कुल सीट 524 हैं. अगर प्रतिशत में देखा जाए तो देश की लोकसभा में महिलाओं को महज 12.6 प्रतिशत प्रतिनिधित्व ही मिला है. दुनिया भर के संसद के मुकाबले यह लगभग आधा है. इस साल के 1 जनवरी को विश्व में महिलाओं का 24.3 प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला हुआ था.

महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका देने के मामलें रवांडा वर्तमान में दुनिया में पहले स्थान पर है. इसके 80 सीटों वाले निचले सदन में 49 महिला सांसद हैं.

यह सब देखते हुए सवाल उठता है कि क्या नरेन्द्र मोदी जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए भी ‘अच्छे दिन’ का वादा किया था, वे इस बार के चुनाव में उचित संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे? कम से कम अपनी पार्टी की तरफ से. क्या राहुल गाँधी जो चुनाव जीतने के बाद महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रहे हैं, वो इस चुनाव में कम से कम 33 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाओं के बनायेंगे?

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