अमेरिका डायरी 2: निःशक्त हैं, असमर्थ नहीं

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प्रतीकात्मक तस्वीर

सपना जैन/

सुबह छह बजे वॉक पर निकलते ही सोसाइटी गेट से, बस अंदर आकर बिल्डिंग के सामने रुकी, बस का गेट खुलते ही ज़ूम की आवाज के साथ एक फिसलपट्टी नुमा स्लाइड बाहर आई,और सामने से व्हील चेयर पर आते अंकल बस में आराम से प्रवेश कर अपनी कार्यस्थली को रवाना हुए।

यह पढ़कर यदि आपके दिमाग ने किसी VIP की कल्पना की हो, तो आप भूल पर हैं। क्योंकि अमेरिका में स्कूल ऑफिस जाने हेतु हर आम डिसेबल (शारीरिक, मानसिक असक्षम) को यह सुविधा उपलब्ध है।

क्या आप किसी भी शारीरिक या मानसिक रूप से अपाहिज व्यक्ति की मनोदशा भांप सकते हैं? सारा कष्ट और संघर्ष ही इस बात का है कि वह आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन कैसे जियेगा? माफ़ कीजिये, मैं अभी किसी सरकारी आरक्षण या अनुदान के टॉपिक पर नहीं हूं। यह तो हर देश की अपनी-अपनी नीतियां हैं। परंतु एक असामान्य इंसान का जीवन प्रतिदिन, प्रतिक्षण किस प्रकार सामान्य और सुविधाजनक बनाया जा सकता है, इस पर अमेरिका में की गई व्यवस्था देखिये-

प्रत्येक हाउसिंग सोसायटी में कुछ घर डिसेबल के लिए न सिर्फ रिज़र्व हैं, बल्कि उनकी सुविधानुसार डिजाइन किए गए हैं। मसलन, घर के द्वार से लेकर, हर कमरे गैलरी की चौड़ाई, फर्श, बाथरूम, किचन प्लेटफॉर्म, गैस स्टोव, इलेक्ट्रिक स्विच की पहुंच, स्पेस,लोकेशन बनाते वक्त व्हील चेयर पर बैठे व्यक्ति को ध्यान में रखा गया।

प्रत्येक हाउसिंग सोसायटी में कुछ घर डिसेबल के लिए न सिर्फ रिज़र्व हैं, बल्कि उनकी सुविधानुसार डिजाइन किए गए हैं

पूरे देश में जहाँ कहीं भी पार्किंग व्यवस्था है, सबसे करीब और सबसे सुविधाजनक पार्किंग डिसेबल साइन के साथ रिज़र्व है। जहाँ एक तरफ पावर्ड सेल्फ ऑपरेटेड व्हीलचेयर्स आपको किसी का मोहताज नहीं करतीं, वहीं दूसरी तरफ आपको एयरपोर्ट, हर स्टोर, हर सुपर मार्केट में व्हीलचेयर कम कार्ट(सामान रखने की ट्राली)की व्यवस्था मिलेगी,जो सीनियर सिटीजन या डिसेबल के लिए रिज़र्व हैं। और तो और व्हीलचेयर हाइट पर सेल्फ चेक आउट पेमेंट काउंटर्स भी हैं। और एक सराहनीय कदम, महिला-पुरुष प्रसाधन के अलावा फैमिली टॉयलेट भी हर जगह उपलब्ध हैं, जो बच्चों और डिसेबल के साथ किसी भी पैरेंट या अटेन्डेन्ट के लिए ओपन हैं।

अमेरिका के आठ-दस स्टेट्स का भ्रमण करने के बाद यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस देश में ऐसा कोई स्थान नहीं जहां व्हील चेयर से न पहुँचा जा सके। हर रास्ते, साइड वॉक, बिल्डिंग, मार्केट, पार्क, हॉस्पिटल, होटल, मॉल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि कोई भी डिसेबल व्यक्ति बिना मदद अपना काम कर सके। यहां तक कि दरवाजों के हैंडल और स्टोर्स के निचले रैक पर ही उपलब्ध हर जरूरी सामान की व्यवस्था में भी रिसर्च नजर आती है।

हर  रास्ता, साइड वॉक, बिल्डिंग, मार्केट, पार्क, हॉस्पिटल, होटल, मॉल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि कोई भी डिसेबल व्यक्ति बिना मदद अपना काम कर सके

ATM और गैस स्टेशन रोड साइड इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि कार से बिना उतरे आपका काम हो जाये। सबसे जरूरी बात, कहते हैं-अमेरिका में बिना कार हर इंसान अपाहिज है। फिर कोई हैरानी की बात नहीं कि डिसेबल फ्रेंडली ऐसी कारें उपलब्ध हैं, जिसमें व्हीलचेयर को ड्राइविंग स्पेस पर लगाकर आसानी से मूव हुआ जा सकता है।

किसी राष्ट्र द्वारा अपने देशवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इतनी रिसर्च, प्लानिंग, और उसे ईमानदारी से कार्यान्वित करना, कुछ अविश्वसनीय सा लगता है। यह तो तय है, कि डिसेबल हों या सीनियर सिटीजन यदि अमेरिका में है तो किसी का मोहताज नहीं।

अच्छी व्यवस्था में इंसान असक्षम हो सकता है, पर असमर्थ नहीं। यह केवल दिव्यांग कहलाने से आगे की बात है।

(लिखने, पढ़ने, यात्रा, चित्रकला, कुकिंग की शौक़ीन सपना जैन, एम कॉम, एम एड के अलावा संगीत में स्नातक और कत्थक डांसर हैं। कोतमा मध्य प्रदेश से आती हैं, और पिछले कई साल से अमेरिका के कोलंबिया दक्षिण कैरोलिना में रहती हैं।)

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