छात्र गोली चलायें तो शिक्षक भी वैसा ही करें, ऐसे विचार केवल ट्रम्प जैसे नेता ही दे सकते हैं

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आईएएनएस
डोनाल्ड ट्रम्प

उमंग कुमार/

आँख के बदले आँख का सिद्धांत एक दिन पूरी दुनिया को अँधा कर देगा, महात्मा गांधी ने एक बार कहा था. लेकिन यह तो ज़ाहिर है कि उनका यहाँ कथन वर्तमान के बड़े नेताओं की समझ में नहीं आया है. ताज़ा उदाहरण है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जिन्होंने अमेरिका में बढ़ते अंधाधुंध गोली-बारी से निपटने के लिए जो रास्ता सुझाया है वह चौंकाने वाला है.

हाल ही में फ्लोरिडा के स्कूल में हुए गोलीबारी के बाद डोनाल्ड ट्रंप गोलीबारी के पीड़ितों एवं उनके परिवार से मिले . वहीँ उन्होंने पैरवी की, कि शिक्षकों को भी बंदूक रखना चाहिए. ट्रंप ने स्कूल में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए स्कूली शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पास बंदूक रखने की सलाह दे डाली.

फ्लोरिडा में हुई गोलीबारी की घटना में 17 लोगों की मौत हुई थी. इस घटना को स्कूल के ही एक पूर्व छात्र निकोलस क्रूज ने अंजाम दिया था.

एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप छात्रों एवं उनके परिजनों से रूबरू हुए. इस दौरान छात्रों एवं उनके परिजनों ने बंदूक हिंसा पर सख्त कदम उठाए जाने की मांग की. अपने शासक से पीड़ितों का ऐसा अपील करना स्वाभाविक है लेकिन ट्रम्प ने जो सुझाव दिया वह समझ से परे है. ट्रंप ने कहा, “यदि आपके शिक्षक के पास बंदूक होती, तो वह इस हमले को बहुत जल्दी खत्म कर सकते थे.”

लोगों को ट्रम्प से यह उम्मीद होगी कि वह अमेरिका में बढ़ते हथियारों की संस्कृति को ही ख़त्म करें जबकि इसके उलट ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका में शिक्षक और छात्र आपस में ही गोलीबारी कर सही-गलत का निर्णय कर लें

राष्ट्रपति ने कहा, “यकीनन, उन शिक्षकों को बंदूक रखने होंगे, जो इसे चलाने में निपुण हैं.” लोगों को ट्रम्प से यह उम्मीद होगी कि वह अमेरिका में बढ़ते हथियारों की संस्कृति को ही ख़त्म करें जबकि इसके उलट ट्रम्प चाहते हैं कि अमेरिका में शिक्षक और छात्र आपस में ही गोलीबारी कर सही-गलत का निर्णय कर लें.

अमेरिका में कम से कम 40 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनके पास हथियार (बन्दूक) हैं या वह ऐसे घर में रहते हैं जहां बन्दूक मौजूद है. विकसित देशों में अमेरिका सबसे ऊपर है जहां इन बंदूकों से लोगों की हत्या हुई है. वर्ष 2016 में अमेरिका में 11 हज़ार लोगों की बन्दूक से हत्या हुई थी.

आप सोचते होंगे कि ऐसा क्यों है? वह इसलिए कि वहाँ का नेशनल राइफल एसोसिएशन बहुत ही मजबूत है. यह एसोसिएशन अमेरिका में लोबिंग पर बहुत पैसा खर्च करता है ताकि सरकार किसी तरह के सख्त कानून न ला पाए और बंदूकों की धड़ल्ले से बिक्री जारी रही. यह एसोसिएशन चुनावी चंदे भी खूब देता है.

इसको जानने के बाद आपको यह तो समझ में आ ही जाएगा कि ट्रम्प अध्यापकों को बन्दूक देने की सिफारिश कर लोगों की जान बचाना नहीं चाहते बल्कि और अधिक बंदूकों की बिक्री कराना चाहते हैं.

(आईएएनएस से इनपुट के साथ)

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