कुपोषण से निपटने के लिए तीन भाजपा शासित राज्य होंगे सम्मानित

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सौतुक डेस्क/

मंगलवार को तीन भाजपा शासित राज्यों को कुपोषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार सम्मान देगी.

इन तीन राज्यों में  छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात शामिल है. छत्तीसगढ़ और गुजरात में तो भाजपा का सीधे शासन है. वहीँ अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल के साथ यह पार्टी गठबंधन में है.

सरकार के अनुसार इन तीन राज्यों को एनएफएचएस -3 और एनएफएचएस -4 के बीच मापा गया स्टंटिंग में कमी के क्षेत्र में अच्छी प्रगति के लिए सम्मानित किया जाएगा.

महिला और बाल विकास मंत्रालय मिशन मोड में देश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में पहली बार राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है. सोमवार को नई दिल्ली में सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मेलन महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. सम्मेलन “कुपोषण मुक्त भारत -2022” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित हो रहा है.

महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है और इस उद्देश्य के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नीति आयोग के समग्र सूचकांक के आधार पर और एनएफ़एचएस -4 डेटा से स्टंटिंग प्रचलन के आधार पर राज्यों / संघ शासित प्रदेशों के 113 जिलों को चिन्हित किया है ताकि चयनित जिले में की गई कार्रवाई को अन्य जिलों में भी अपनाया जा सके। प्रत्येक राज्य / संघ शासित प्रदेश से एक जिले का चयन किया गया है ताकि चयनित जिले में लिए गए निर्णय को अन्य जिलों में भी दोहराया जाए.

दिल्ली में आज हो रहे इस सम्मेलन में उच्च भार वाले 113 जिलों में जिला कलेक्टर / उपायुक्त / जिला मजिस्ट्रेट के साथ-साथ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, पोषण (आईसीडीएस / एसडब्ल्यू), पेयजल और स्वच्छता विभाग के जिला स्तर के अधिकारी प्रधान सचिवों और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों/ तीनों विभागों के सचिवों के साथ स्टंटिंग, कुपोषण और बर्बादी की समस्या संवाद करेंगे.

इन 113 उच्च बोझ वाले जिलों में जिला मजिस्ट्रेट / जिला कलेक्टर / डिप्टी कमिश्नर एक डैशबोर्ड के माध्यम से, नियमित रूप से तीन महीने की अवधि में कम से कम एक बार अपने क्षेत्राधिकार के विभागों में पोषण के विभिन्न पहलुओं को कवर करने वाली योजनाओं की निगरानी और समीक्षा करेंगे. पोषण और स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष असर वाली योजनाओं को लागू करने के लिए जिला स्तर पर इस तरह की समीक्षा और निगरानी प्रत्येक वर्ष के जनवरी, अप्रैल, जुलाई तथा अक्टूबर महीने की 1 से 10 तारीख जनवरी को विशेष और समर्पित तरीके से होगी.

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