देश में सबकुछ अच्छा चल रहा है, यह बताने का सरकार का तरीका देखिये

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शिखा कौशिक/

नरेन्द्र मोदी सरकार चाहती है कि आप मानें कि पिछले पांच साल में सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. इसके लिए सरकार ने कई ऐसी रिपोर्ट्स दबा कर रखी हैं जिससे उनके इस दावे की पोल न खुल जाए. फिलहाल कम से कम पांच ऐसी रिपोर्ट हैं जो सरकार जारी नहीं कर रही है और इसके लिए पिछले दो दिन से केंद्र सरकार बैकफुट पर भी है.

इसी सप्ताह राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो बड़े अधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया. यह कहते हुए कि सरकार इनलोगों के द्वारा तैयार किये गए रोजगार के आंकड़े को लेकर बैठ गई है. इनका कहना था कि इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि नोटबंदी से कैसे देश में बेरोजगारी बढ़ी है. आईये देखते हैं सरकार ने कौन-कौन से आंकड़े जारी नहीं किये हैं.

1– रोजगार सर्वेक्षण 2017-18: यही रिपोर्ट है जिसने बजट के एक दिन पहले ही सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है. इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में बेरोजगारी पिछले चालीस साल का रिकॉर्ड तोड़ रही है.

2– दुर्घटना और आत्महत्या रिपोर्ट: इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में हो रही दुर्घटना बढ़ रही है या घट रही है. यह भी कि कितने लोगों ने एक साल में आत्महत्या की है. इस आत्महत्या वाले सेक्शन में यह भी पता चलता है कि किसानों के आत्महत्या का स्तर क्या है. प्रत्येक साल आने वाली यह रिपोर्ट पिछले चार साल से जारी नहीं की गई है. इस तरह मोदी सरकार बताना चाहती है कि देश में किसान आत्महत्या ही नहीं कर रहे हैं.

3– विदेशी निवेश के आंकड़े: डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पालिसी एंड प्रोडक्शन हर तिमाही सीधे विदेशी निवेश के आंकड़े जारी करता है. इससे अर्थव्यवस्था की स्थिति का अंदाजा मिलता है. लेकिन पिछले जून से ही सरकार ने यह आंकड़ा जारी नहीं किया है. यह तब है जब भारतीय रिज़र्व बैंक लागातार ज़रूरी इनपुट सरकार को भेजता रहा है. इसकी पुष्टि बिज़नस टुडे पत्रिका ने की है.

4- राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण: इसकी शुरुआत 201 6 में हुई थी ताकि विभिन्न उम्र के बच्चों के पोषण की स्थिति का पता चल सके. इस सर्वेक्षण में  (0-4 साल),  स्कूल जाने वाले (5-14 साल) के बच्चे और (15-19 साल) के युवाओं के स्थिति का जायजा लिया जाता है. इंडिया स्पेंड नाम की वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार, 2016 से यह रिपोर्ट बनकर तैयार है पर सरकार ने इसे रिलीज़ नहीं किया.

5– इसी तरह सरकार ने स्वच्छता अभियान से सम्बंधित आंकड़ो को वेबसाइट से हटा लिया है. मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार स्वच्छ भारत- ग्रामीण का आंकड़ा वेबसाइट से हटा लिया है. अब कितने शौचालय बने, कितना पैसा खर्च हुआ इत्यादि के लिए आपको सरकार के द्वारा दिए गए आंकड़ों पर ही भरोसा करना होगा.

इन सारी रिपोर्ट को अगर देखा जाए तो पता चलेगा कि सरकार ने कृषि, रोजगार, विदेशी निवेश और स्वास्थ्य सभी क्षेत्रों के आंकड़ों को दबा रखा है और बताना चाहती है कि देश में सबकुछ सही चल रहा है.

 

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