दी क्विंट की सनसनी फैलाने वाली पत्रकारिता से कुलभूषण जाधव की मुश्किलें बढीं

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सौतुक डेस्क/

पिछले कुछ सालों में अगर किसी चीज ने सबसे अधिक अपनी साख गंवाई है तो वह है मीडिया. ताजा उदहारण है ‘दी क्विंट’ नाम की वेबसाइट का. इस वेबसाइट ने शुक्रवार को सूत्रों के माध्यम से खबर प्रकाशित की कि पाकिस्तान में गिरफ्तार कुलभूषण जाधव को भारतीय गुप्तचार संस्था रॉ में बतौर जासूस शामिल करने पर दो अधिकारीयों ने आपत्ति जताई थी. इसके मायने यह हुआ कि कुलभूषण जाधव भारतीय गुप्तचर संस्था से जुड़ा रहा है. भारत इससे इनकार करता रहा है.

सनद रहे कि भारत पाकिस्तान में अभी इसी बात पर एक कुटनीतिक जंग चल रही हैं. पकिस्तान ने जाधव को गिरफ्तार कर उसे भारतीय जासूस करार दिया था और कहा था कि यह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में माहौल ख़राब करने के उद्देश्य से पकिस्तान में रह रहा था. पकिस्तान के आरोप को भारत ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था और बताया था कि यद्यपि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना में कभी काम किया करता था पर बहुत पहले सेवानिवृत होने के बाद से अब वह संपर्क में नहीं है.

हाल ही में पाकिस्तान ने बहुत दिनों तक नकारने के बाद जाधव की मां और पत्नी को जाधव से मिलने की इजाज़त दी. उसके बाद भी दोनों देशों में वाक् युद्ध हुआ. भारत ने इन दोनों महिलाओं के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया वहीँ पाकिस्तान ने नए-नए वीडियो रिलीज़ कर भारत के ऊपर आरोप मढ़े.

क्विंट की इस नई खबर ने इस कुटनीतिक जंग में अपनी नासमझी का एक ऐसा पैंतरा खेला है कि इससे न केवल पाकिस्तान को थोड़ी बढ़त पर पाकिस्तान में फांसी की सजा के खतरे से जूझ रहे कुलभूषण जाधव के जान को खतरा भी हो सकता है.

खबर प्रकाशित करने के कुछ ही देर बाद लोगों ने इस वेबसाइट की भर्त्सना शुरू की. और इस वेबसाइट ने अपनी खबर हटा ली. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.

पाकिस्तान के सरकार ने ट्वीट कर दिया कि भारत के एक विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने बताया कि जाधव भारतीय सुरक्षा एजेंसी रॉ के साथ जुड़ा था.

‘दी क्विंट’ के द्वारा खबर हटाने के बाद पाकिस्तान के मीडिया ने लपक लिया. वहाँ के एक अखबार ‘दी एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने क्या लिखा है इसकी बानगी देखिये, “भारत के एक प्रसिद्ध समाचार वेबसाइट ‘दी क्विंट’ ने अपनी खबर हटा ली है. इस खबर ने स्पष्ट किया था कि कुलभूषण जाधव रॉ का एक जासूस था. इस खबर शुक्रवार को प्रकाशित किया गया था जिसमें यह बात स्वीकार की गई थी और यह भी कि वह पाकिस्तान में अपना परिचय छिपाने में असफल रहा. लेकिन वेबसाइट ने दबाव में आकर कुछ ही घंटो में यह खबर हटा ली है.”

वरिष्ठ पत्रकार शिवम विज न्यूज़लौंड्री वेबसाइट पर लिखते हैं कि पाकिस्तान सरकार ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि यह खबर लिखने वाला पत्रकार गायब हो गया है और परिवार के सदस्यों के संपर्क में नहीं है. इस खबर लिखने वाले पत्रकार का नाम है चन्दन नंदी है. शिवम विज दावा करते हैं कि उन्होंने चन्दन नंदी से खुद बात की और पकिस्तान सरकार का दावा सरासर गलत है.

लेकिन पाकिस्तान सरकार की इस सक्रियता से इतना तो जाहिर होता है कि इस खबर का महत्व कितना है.

सवाल यह है कि अगर यह खबर गलत थी तो चलाया क्यों? और अगर सही है और मीडिया के सारे पराक्रम में भरोसा है तो हटाया ही क्यों? अपने स्टैंड पर टिके क्यों नहीं रहे?

शिवम विज अपने उसी लेख में दी क्विंट के ऐसे कई उदहारण देते हैं जिसमें इनकी खबरें संदेह पैदा करती हैं. जैसे पाकिस्तान के अंदर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक होने के एक सप्ताह पहले ही इस वेबसाइट ने सर्जिकल स्ट्राइक करा दिया. जिसका अब तक किसी सरकार ने कहीं जिक्र तक नहीं किया है. उसके करीब एक सप्ताह बाद भारत ने बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक किया और मीडिया के माध्यम से जश्न मनाना शुरू किया तो इस वेबसाइट ने अपनी खबर में फेरबदल कर दिया.

ऐसे ही शीना बोहरा मामले में भी इस पत्रकार ने कई आश्चर्य में डालने वाली खबरे लिखीं जिसमें शीना बोहरा को इन्द्राणी मुखर्जी की बहन बताया. अभी तक सब को यही मालूम है कि इन्द्राणी मुखर्जी शीना की मां ही है. हाल ही में इस वेबसाइट से जुड़े एक अन्य पत्रकार ने एक सेना के जवान से बात कर खबर प्रकाशित की और उस जवान ने आत्महत्या कर ली.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अब पत्रकारिता के लिए सेंसेशन पैदा करना पहला लक्ष्य होता जा रहा है, किसी का जीवन, देश, देश की कुटनीतिक हार यह सब बाद की चीज होती जा रही है.

 

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