पिछले पांच सालों में आतंकी हमले में बेतहाशा इजाफा, जवान रहे निशाने पर

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उमंग कुमार/

सीआरपीएफ के जवानों पर बृहस्पतिवार को हुए हमले में चालीस से अधिक जवान शहीद हो गए. यह इस सरकार के कार्यकाल में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है. नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान  न केवल सुरक्षा बलों पर हमलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है बल्कि जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी हमले में भी काफी इजाफा हुआ है.

केंद्र सरकार ने 5 फ़रवरी, 2019 को एक आंकड़ा जारी किया जिससे बदतर होती स्थिति का पता चलता है. गृह मंत्रालय के द्वारा जारी आंकड़ो से पता चलता है कि 2014 से लेकर 2018 तक में सुरक्षा बलों पर होने वाले हमले में 93 फीसदी की वृद्धि हुई है. इसके अतिरिक्त इस पांच सालों में सामान्य आतंकी हमलों में भी 176 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

मोदी के कार्यकाल में कुल 1708 आतंकी हमले हुए हैं. इसके मायने ये हुआ कि प्रत्येक महीने 28 आतंकी घटना. इस सरकार के कार्यकाल में हाई प्रोफाइल आतंकी हमले भी काफी बढे हैं और इन हमलों में सुरक्षा बलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. कभी उरी तो कभी पठानकोट तो अब सीआरपीएफ के काफिले पर हमला. इस सरकार के कार्यकाल में आतंकियों ने सुरक्षा बलों को निशाने पर रखा है. सुरक्षा विशेषज्ञ इस सरकार की बड़ी असफलता मानते हैं.

लोकसभा में दिए गए एक जवाब से ये सारे आंकड़े सामने आये हैं. इसके अनुसार 2014 में कुल 222 आतंकी घटना हुआ. 2015 में इन घटनाओं में थोड़ी कमी आई जब कुल 208 आतंकी हमले हुए. इसके बाद के वर्षों में स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर ही होती दिख रही है. जैसे 2017 में 342 घटनाएं, 2018 में 614 आतंकी हमले हुए.

इस सरकार के कार्यकाल में आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या में भी बेतहाशा इजाफा हुआ है.

2014 और 2018 के बीच कुल 1315 लोगों को आतंकी हमले की वजह से जान गंवानी पड़ी है. इनमें से कुल 138 सामान्य लोग और 339 सुरक्षा बल रहे हैं. सरकार का दावा है कि बाकी के मरने वाले आतंकवादी थे.

एक अन्य जवाब में सरकार ने राज्य सभा में 13 फ़रवरी को बताया है कि 2016 से 2018 के बीच 400 आतंकवादी सीमापार से देश की सीमा में घुसने में सफल रहे हैं. इसका तात्पर्य यह हुआ कि 11 आतंकवादी हर महीने भारतीय सीमा में घुसने में सफल रहे हैं.

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