सर्वोच्च न्यायालय तय करेगा आपके पास निजता का मौलिक अधिकार है या नहीं

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सौतुक डेस्क/
आधार नंबर से जुड़े विवाद में सर्वोच्च न्यायालय  में चल रहे सुनवाई के दौरान  आज पांच न्यायधीशों की पीठ ने बुधवार को निजता के अधिकार तय करने के लिए नौ न्यायधीशों की पीठ में सुनवाई करने का आदेश दिया.  इस सुनवाई में, यह संवैधानिक पीठ तय करेगा कि भारतीय नागरिकों के पास  निजता का मौलिक अधिकार है या नहीं.
आज पांच न्यायधीशों के पीठ के सामने भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि संविधान के तहत भारतीयों को निजता का मौलिक अधिकार नहीं मिला है. इस पर विचार करने के लिए न्यायलय ने नौ न्यायधीशों के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए सभी को ढाई घंटे दिए हैं. केंद्र सरकार के अधिक समय की मांग को पीठ ने ठुकरा दिया.

सनद रहे कि वेणुगोपाल के पहले रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 22 जुलाई 2015 को न्यायधीश केएस पुतुस्वामी बनाम केंद्र सरकार के मामले में यह दलील दी थी कि देश के नागरिकों को निजता का मौलिक अधिकार नहीं मिला हुआ है.

जब से आधार के बारे चर्चा शुरू हुई तब से लोगों को अपनी निजता या कहें प्राइवेसी की चिंता से परेशान रहे हैं. वर्ष 2011 में तो राज्यसभा की एक कमिटी ने इस बिल को इसी निजता के नाम पर लौटा दिया कि पहले इस देश में इस निजता की सुरक्षा करने वाला कोई कानून बनाना होगा तब जाकर आधार को लागू किया जा सकता है.
लोगों को डर है कि उनसे से जुड़े सारे ब्योरे, आंकड़े सरकार एक जगह ला रही है. इस आधार के बूते सरकार या जिसके पास भी यह डाटा होगा वह बड़ी आसानी से सारी जानकारी प्राप्त कर सकता है. लोगों का कहना है कि कोई एक क्लिक करने पर  आसानी से पता कर सकता है कि फलां व्यक्ति के पास कितने का कर्ज है, उन्होंने हाल फिलहाल कहाँ की यात्रा की है. ऐसे में लोगों पर निगरानी करना आसान हो जाएगा. इसको लेकर लोग न्यायलय का दरवाजा खटखटाते रहे हैं पर अभी तक बात उलझी रही है.
इसको लेकर देश भर में कई जगह प्रदर्शन भी होता रहा है. न्यायालय में भी 20 के करीब तो केस चल रहे हैं थे. इन सारे केस की सुनवाई बुधवार को होगी.
अब तक देश में कुल 115 करोड़ लोगों को आधार नंबर दिया जा चूका हैं.  सरकार के अनुसार 18 वर्ष से ऊपर के करीब 99 प्रतिशत लोगों को आधार मुहैया कराया जा चूका है. ऐसा तब हुआ है जब सरकार यह कहती रही है कि आधार किसी के ऊपर थोपा नहीं जाएगा.
यह भी याद रहे कि एक तरफ न्यायालय  आदेश देता रहा है कि आधार को देश की किसी सुविधा के लिए अनिवार्य नहीं किया जाए और दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने लगभग सभी सरकारी सुविधाओं में इस अनिवार्य कर दिया  है.

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