अमेरिकी सर्वोच्च न्यायलय मुस्लिमों के देश में प्रवेश के प्रतिबन्ध की समीक्षा करेगा

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कुछ मुस्लिम देशों से अमेरिका आने वाले यात्रियों पर प्रतिबन्ध लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप के प्रस्ताव पर, वहाँ के सर्वोच्च न्यायलय ने सहमति दे दी है. इतना ही नहीं, न्यायलय ने इस प्रतिबन्ध को आंशिक रूप से लागू करने की छूट भी दे दी है . राष्ट्रपति ने बिना देर किये इस अपनी जीत करार दिया है.

आदेश आने के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि सर्वोच्च न्यायलय का यह फैसला स्पष्ट रूप से अमेरिका के लोगों की सुरक्षा के लिए अहम् है. और इसे अपनी जीत बताया.  अलबत्ता विशेषज्ञों की मानें तो विवादित देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. ये देश हैं इरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन.

न्यायलय के आदेश के बाद, अमेरिका का प्रशासन इन छह लक्षित देशों से आने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ प्रतिबंध को लागू कर सकता है. पर न्यायलय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इनमे वो लोग शामिल नहीं होंगे जिनका सयुंक्त राज्य अमेरिका में  कोई रिश्तेदार है. साथ ही छात्रों, कर्मचारियों पर भी यह प्रतिबन्ध लागू नहीं होता. इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि फैसले से धरातल पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा.

गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने चुनावी वादे में ही अमेरिका के नागरिकों की सुरक्षा हेतु कई देशो से आने वाले शरणार्थियों पर रोक लगाने की बात की थी. वास्तव में यह प्रतिबन्ध 27 जनवरी 2017 को लागू हुआ. इसके बाद अमेरिका के कई हवाई अड्डों पर लोग धरना प्रदर्शन करने लगे.

यह सब देखते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने पुराने आदेश में कुछ सुधार करते हुए विगत 6 मार्च एक नया आदेश लागू किया. ट्रम्प के अनुसार यह आदेश पुराने आदेश का ही पॉलिटिकली करेक्ट रूप था, ऐसा उन्होंने खुद कहा था और वे अपने इस नए आदेश से खुश नहीं थे. उनका कहना था कि तमाम देशों में हो रहे आतंकवादी हमलों के मद्देनजर यह एक ज़रूरी कदम है. हाल में कई देशों में जैसे पेरिस, लन्दन, ब्रुसेल्स, बर्लिन इत्यादि जगहों पर आतंकवादी हमले हुए थे. लेकिन इस आदेश के तुरंत बाद, अमेरिका के कई स्थानीय नयायालयों ने इस प्रतिबन्ध को लागू करने पर रोक लगा दी.

इन न्यायलयों का यह मानना था कि राष्ट्रपति ट्रम्प का यह प्रतिबन्ध आतंकवादी घटना का परिणाम न होकर, इस्लामोफोबिक अधिक लगता है.

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