धारा 377 और समलैंगिक सम्बन्ध के बारे में कुछ ज़रुरी तथ्य

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शिखा कौशिक/

सोमवार को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 2013 के फैसले पर पुनर्विचार करने की बात कहकर समलैंगिक लोगों के मन में एक नई उम्मीद जगाई है. इससे लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर (LGBT) समुदाय के लोगों को फायदा पंहुचने की उम्मीद है.

अपने दिसम्बर 2013 के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने सहमति के साथ भी समलैंगिक सम्बन्ध बनाने को अपराध करार दिया था. इस तरह सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के 2009 के इंडियन पीनल कोड की धारा 377 को लेकर दिए गए फैसले को भी खारिज कर दिया जिसमें समलैंगिको के ‘सहमति के साथ सम्बन्ध’ को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया था.

आईये समझते हैं धारा 377 और समलैंगिक सम्बन्ध को लेकर कुछ जरुरी बातें.

कानून क्या कहता है?

आईपीसी की धारा 377 सन् 1862 में अस्तित्व में आया था जो अप्राकृतिक सम्बन्ध को परिभाषित करता है और इसके तहत सजा मुक़र्रर होती है.  इसके अनुसार, “जो भी होशो-हवास में किसी पुरुष, महिला या जानवर के साथ अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाता है वह ताउम्र जेल, या अपराध के ब्योरे के अनुसार सुनाई गई सजा जो कि दस साल तक की हो सकती है और जुर्माने का दोषी होगा”

दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला

जुलाई 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी स्थानों पर समलैंगिक सम्बन्ध बनाने को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था और धारा 377  के बारे में कहा था कि यह गे इंसान को इज्जत की जिंदगी जीने देने में बाधक है.

सर्वोच्च न्यायलय का फैसला

दिल्ली उच्च न्यायलय के फैसले के खिलाफ जाते हुए सर्वोच्च न्यायलय ने इसे पुनः अपराध की श्रेणी में रख दिया और गेंद संसद के पाले में डाल दी कि अगर इसमें कुछ सुधार होना है तो संसद को इससे जुड़े कानून में सुधार करना होगा.

अंतर्राष्ट्रीय उथल पुथल

इसी बीच LGBT समुदाय के पक्ष में कई देशों में सकारात्मक बदलाव आये. मई 2015 में, आयरलैंड ने समलैंगिकों यानि दो पुरुष या दो महिला के बीच शादी को कानूनी तौर पर मान्यता दे दी. इस देश ने 1993 में इसे अपराध घोषित किया था और 2015 में इसे अपना मत बदलना पड़ा.

इसी तरह जून 2015 में अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को वैध माना. भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने 2007 अपने नए संविधान में समलैंगिक विवाह को वैध माना.

इसके अतिरिक्त फ्रांस, इंग्लैण्ड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्राज़ील ने समलैंगिक सम्बन्ध को अपराध की श्रेणी से मुक्त कर दिया है. अन्य देश जैसे ब्राज़ील, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, आइसलैंड, इरेलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, स्वीडन, उरुग्वे इत्यादि ने भी अब समलैंगिक शादी की इजाज़त दे रखी है.

भारत अभी नाइजीरिया, घाना, इरान, सऊदी अरब, अफ़ग़ानिस्तान, क़तर, और पाकिस्तान जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा है जहां समलैंगिक सम्बन्ध अपराध की श्रेणी में देखा जाता है.

 

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