मध्य प्रदेश में यूनिवर्सल बेसिक इनकम लागू किया गया और ये नतीजा निकला

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फोटो: साभार मिंट

शिखा कौशिक/

चुनावी मौसम में जब दोनों बड़े राष्ट्रीय दल जनता को लुभाने के लिए नए-नए वादे कर रहे हैं. इसी बीच राहुल गाँधी ने एक ऐसा वादा कर दिया है जिसकी काट शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास नहीं है. छत्तीसगढ़ में बोलते हुए राहुल गाँधी ने वादा किया कि अगर उनकी पार्टी सरकार में आएगी, तो यूनिवर्सल इनकम यानी सभी परिवारों के लिए एक सुनिश्चित आय देने का प्रावधान लाएगी. इस मुद्दे पर तमाम बहस जारी है पर क्या आपको मालूम है कि देश में इस विचार को लेकर एक प्रयोग हो चुका है और उसका परिणाम क्या निकला?

मध्य प्रदेश के 20 गाँवों में ऐसा प्रयोग हुआ और देखा गया कि लोगों पर इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा. जून 2011 से नवम्बर 2012 तक चलने वाला यह प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ और सेल्फ एम्प्लोयेड विमेंस एसोसिएशन (SEWA) के सहयोग से चलाया गया.

अठारह महीने के इस प्रयोग में छः हजार लोगों को बिना किसी शर्त के एक नियत पैसा दिया जाने लगा. इस प्रयोग में प्रति व्यक्ति को 300 रुपये और प्रत्येक बच्चे को 150 रुपये दिया गया. ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह पैसा परिवार को न देकर, व्यक्ति को दिया गया ताकि पैसा खर्च करने पर घर का दबाव कम से कम हो. शोधकर्ताओं ने इतनी ही संख्या में ऐसे भी गाँव लिए जहां कोई पैसा नहीं दिया गया.

अध्ययन पूरा होने के बाद देखा गया कि जिन लोगों को पैसा दिया गया वे महत्वपूर्ण जरूरतों पर ही पैसा खर्च कर रहे थे जैसे पोषण, इलाज, साफ़-सफाई, नया व्यवसाय, बच्चों को स्कूल भेजना इत्यादि.

इस अध्ययन का निष्कर्ष यह निकला कि 68 फीसदी परिवारों में लोग पैसे का सही इस्तेमाल कर अपना जीवन स्तर बढाने की कोशिश कर रहे हैं. बच्चों का समय विद्यालय में अधिक बीतने लगा था और कुछ लोगों ने तो इस पैसे को भविष्य के लिए जमा भी कर लिया था. उन गाँवों में जहां यह राशि नहीं दी गई थी वहाँ के मुकाबले यहाँ लोगों की स्थिति सुधरी.

राहुल गांधी के घोषणा के बाद कई लोग यह कहते हुए पाए जा रहे  हैं कि इससे लोगों में आलस बढेगा. मध्य प्रदेश में हुए इस प्रयोग ने इस डर को भी गलत साबित किया.  बल्कि इस प्रयोग से लोगों में भविष्य के प्रति चिंता भी बढ़ती दिखी.

शायद यही वजह है कि पूर्व प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमण्यम ने भी 2017 के इकनोमिक सर्वे में ऐसी योजना लाने की जरुरत पर बल दिया था. सुब्रमण्यम ने कहा था कि इतनी सारी योजनायें हैं जिसपर ढेर सारा पैसा खर्च किया जा रहा है. उस समय देश में केंद्र सरकार कि 950 योजनायें थी. पूर्व आर्थिक सलाहकार ने कहा था कि इन सबको बंद कर यही यूनिवर्सल इनकम की योजना लानी चाहिए.

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