प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार को ‘भारत का महान सपूत’ बताया

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सौतुक डेस्क/

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय राजनीति में एक ऐसा कदम उठाया है जिसका असर लम्बे समय तक रहने वाला है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आयोजन में सिरकत करने गए मुखर्जी ने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को ‘भारत माता का एक महान सपूत’ बताया. मुखर्जी कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं.

नागपुर पहुँचाने के बाद मुखर्जी ने हेडगेवार के जन्मस्थल का दौरा किया और आगंतुकों के लिए मौजूद किताब में लिखा, “मैं आज यहां भारत माता के महान सपूत को मेरी श्रद्धांजलि और सम्मान पेश करने आया हूं.” आरएसएस की पहली बैठक हेडगेवार के घर में हुई थी, जिसकी स्थापना उन्होंने 1925 में की थी.

जब से मुखर्जी के इस आयोजन में शामिल होने की खबर उड़ी तभी से इस कदम के विरोध और समर्थन में लोग अपना तर्क देना शुरू कर दिया. यहाँ तक कि खुद प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी प्रणब को इसमें नहीं शामिल होने का निवेदन किया. उन्होंने ट्वीट किया कि लोग आपका भाषण भूल जायेंगे लेकिन तस्वीर मौजूद रहेगी. और इस तस्वीर की लोग अपने हिसाब से व्याख्या करेंगे. उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अफवाह को उदाहरण के तौर पर जिक्र किया कि कैसे भाजपा और संघ की मशीनरी प्रोपगंडा तैयार करती है. सनद रहे कि हाल ही में यह खबर उड़ी के प्रणब मुखर्जी की बेटी भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ेंगी.

आरएसएस के मुख्यालय में गर्मजोशी से स्वागत के बाद, मुखर्जी को हेडगेवार स्मारक परिसर दिखाया गया, जहां एक छोटा मंदिर भी मौजूद है.

मैं आज यहां भारत माता के महान सपूत को मेरी श्रद्धांजलि और सम्मान पेश करने आया हूं

यहां पहुंचने पर प्रणब मुखर्जी का हवाईअड्डे पर आरएसएस पदाधिकारियों ने स्वागत किया. लेकिन, इस मौके पर कांग्रेस का कोई सदस्य मौजूद नहीं था.

राष्ट्रपति बनने से पहले दशकों तक कांग्रेस पार्टी में रहे मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं. वह यहां तीन वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘तृतीय वर्ष वर्ग’ के समापन समारोह में आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

उनके इस दौरे की उनकी पार्टी के कई नेताओं समेत कई अन्य लोगों ने आलोचना की है.

महात्मा गांधी की हत्या के बाद 4 फरवरी 1948 को आरएसएस को प्रतिबंधित कर दिया गया था. इस प्रतिबंध को 11 जुलाई 1949 को तब हटाया गया था, जब तत्कालीन सरसंघचालक एम.एम. गोलवलकर ने वचन (अंडरटेकिंग) दिया था कि संगठन भारतीय संविधान का पालन करेगा.

आलोचनाओं के बीच, पूर्व राष्ट्रपति यहां बुधवार शाम को आए थे और आरएसएस के अधिकारियों ने यहां उनका हवाईअड्डे पर स्वागत किया. हवाईअड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए कांग्रेस से कोई मौजूद नहीं था.

शहर में बारिश की संभावना के बीच, समारोह के लिए एक अन्य वैकल्पिक सभागार की व्यवस्था की गई है.

मौजूदा जानकारी के अनुसार, मुखर्जी यहां 20 मिनट तक आरएसएस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और उसके बाद वह गुरुवार देर रात यहां से जाने से पहले आरएसएस नेताओं के साथ रात्रिभोज करेंगे.

आईएएनएस से इनपुट के साथ

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