सरदार सरोवर परियोजना: आज प्रधानमंत्री जो नहीं बताएँगे

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उमंग कुमार/

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. इस मौके पर मोदी भारत के अब तक के इतिहास में बने सबसे ऊँचे बाँध को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह उत्सव गुजरात के केवादिया में मनाया जाएगा. हाल में इस बाँध की ऊँचाई 136.68 मीटर बढ़ाई गई जिससे यह भारत में बना अब तक का सबसे ऊँचा बाँध बन गया.

इस मौके पर प्रधानमंत्री जो बताएँगे वो सब कुछ ऐसा होगा. इस बाँध से गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को फायदा होगा. इस परियोजना की वजह से नर्मदा नदी से गुजरात के उन इलाकों में पानी ले जाने में सफलता मिली है जहां इसकी भारी किल्लत थी. इससे करीब दस लाख किसानों के खेतों में सिंचाई हो सकेगी और तमाम गाँव और छोटे क़स्बों में पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. ऐसे लोगों की संख्या करीब 4 करोड़ है. इससे अरबों यूनिट की बिजली पैदा होने की उम्मीद हैं.

प्रधानमंत्री जो नहीं बताएँगे उसपर भी गौर करिए. इसके लिए सौतुक ने इन राज्यों में विरोध कर रहे कुछ लोगों सी बात की. जैसे पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश  के धार जिले के रहने वाले सुखदेव पाटीदार जिनका घर डूबने वाला है. इतने सालों के गुजरने के बाद भी उनका पुनर्वास नहीं किया गया है. करीब तीन महीने पहले आनन-फानन में उनके गाँव से तीन किलोमीटर दूर एक तात्कालिक व्यवस्था की गई. सरकार ने  10*10 के क्षेत्र में टीन शेड डालकर उनको बता दिया कि आप वहाँ जाकर रहिये. इनके परिवार में छः लोग है.

पाटीदार के अनुसार वहाँ जीने के लिए मूलभूत जरुरत जैसे पानी बिजली नहीं है. इनके अनुसार सरकार मीडिया मैनेजमेंट के मद्देनजर बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती हैं जैसे हर विस्थापित को 5 लाख रुपये देने का वादा. पर जब देने की नौबत आती है तो नए-नए शर्त थोपती है. उदाहरण के लिए कि अगर आपके घर में गाड़ी है तो आपको वह लाभ नहीं दिया जाएगा.

पाटीदार अकेले नहीं है. सरदार सरोवर परियोजना में मध्यप्रदेश के 192 गांव व एक नगर धरमपुरी डूब में जा रहा है, महाराष्ट्र के 33 गांव एवं गुजरात के 19 गांव डूब में जा रहे है. अभी भी मध्यप्रदेश में 40 हजार परिवारों का पुनर्वास करना बाकी है, इसके पहले ही डूब आ गई है, सरकार बिना पुनर्वास के लोगों को हटाने की कोशिश कर रही है, ऐसा मध्य प्रदेश में आन्दोलन कर रहे लोगों का कहना है.

इस परियोजना के खिलाफ मध्य प्रदेश और गुजरात दोनों राज्यों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. शुक्रवार से छोटा बरदा में मेधा पाटकर के साथ 37 विस्थापित जलसत्याग्रह कर रहे हैं. इन विरोध करने वालों का सवाल है कि बिना पुनर्वास कैसे डूब आ रही है, उपर के बांध खाली होते हुए भी सरदार सरोवर बांध को भरने के लिए नर्मदा घाटी की जलहत्या की जा रही है.

उनकी मांग है कि सभी विस्थापितों का पुनर्वास किया जाये उसके बाद ही सरदार सरोवर बांध को भरा जाये. फिर भी नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के लिए 244 गांव और एक नगर की जलहत्या की जा रही है, इसमें मध्य प्रदेश का एक काफी बड़ा क्षेत्र प्रभावित हो रहा है. उधर गुजरात में भी लोग धरने पर बैठे है. उनका कहना है कि  बांध परियोजना का काम अधूरा है और 70 प्रतिशत से अधिक नहरों का काम होना बाकी है. फिर भी सरकार, गुजरात में होने वाले चुनावों की रणनीति के लिए सरदार सरोवर बाँध का उदघाटन करके और बांध पूरा होने का भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.

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