हुज़ूर आते आते बहुत देर कर दी

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श्रोत-पीआईबी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संसदसत्र शुरू होने से पहले सभी दलों के बैठक में बोलते हुए.

सौतुक डेस्क/

देश में गौरक्षा के नाम पर हो रहा तांडव रुकने का नाम नहीं ले रहा है. काफी विरोध के बावजूद भी हत्यारी भीड़ पर कोई असर होता नहीं दिख रहा. व्यवसाय के उद्देश्य से मवेशी ले जाने वालों तक पर हमला हो जा रहा है. उत्तेजित भीड़ लोगों को इस इल्ज़ाम पर मार दे रही है कि वो गोमांस खाते हैं. वो भी बिना उनसे पूछे या उनको अपना पक्ष रखने का मौका दिए. 

देश के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने इस मुद्दे पर शायद दूसरी बार मुंह खोला है . पहली बार उन्होंने साबरमती में इस बारे में बोला था. एक तरफ मोदी गौरक्षा के नाम पर  हो रही हत्याओं के खिलाफ बोल रहे थे और दूसरी तरफ उसी दिन झारखण्ड में एक मीट व्यवसायी को भीड़ ने मार डाला और उसकी कार में आग लगा दी.
 
आज प्रधानमंत्री ने दूसरी बार ऐसी घटनाओं को रोकने की बात की. वो संसद के मानसून सत्र शुरू होने के ठीक एक दिन पहले सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक में बोल रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से अनुरोध किया कि गौरक्षा के नाम पर हो रही साम्प्रदायिक हिंसा रोकने और भ्रष्टाचार से लड़ने के कार्य में वे सरकार को सहयोग दे. मोदी ने कहा कि सभी राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग करना चाहिए और कानून तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए.
 
प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य अचरज से भरा है. संसद-सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले इस मुद्दे पर बोलने का पहला उद्देश्य तो यही दिखता है कि यह मुद्दा इस सत्र में तूल न पकडे. याद रहे कि विपक्ष इस मुद्दे को मानसून सत्र में उठाने वाला है. 
 
अन्यथा अन्य राजनितिक दलों से इस मुद्दे पर मदद माँगने का क्या मतलब हो सकता है. गौरक्षा के नाम पर होने वाले अधिकतम हमले भाजपा-शासित राज्यों में ही हुए हैं. जिनमे झारखण्ड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शामिल हैं.
 
यह भी स्पष्ट है कि ये हमला करने वाले लोग कहीं न कहीं से समर्थन पा रहे हैं. अन्यथा कोई हत्या करने वाला इतना निडर कैसे हो सकता है कि वो अपने इस अपराध का खुद वीडियो बनाए या तस्वीर उतारे और खुद लोगों में फैलाए. 
 
ऐसे में उनके दल और सरकार का एक कड़ा सन्देश इस तरह के हमले रोक सकता था, जिसमे सजा पाने वाले को एक मौका तक नहीं मिलता कि वो अपना पक्ष रख सकें.
करीब एक पखवाड़े पहले डाटा पर आधारित पत्रकारिता करने वाली एक वेबसाइट इंडियास्पेंड ने पिछले कुछ सालों में होने वाली ऐसी घटनाओं का अध्ययन किया. इस वेबसाइट के अनुसार देश में वर्ष 2010 से इस तरह की कुल 63 घटनाएं हुई जिसमे गाय के नाम पर लोगों पर हमला हुआ. कुल 63 में से 61 नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हुईं. इन हमलों में  कुल 28 लोग मरें जिसमे 24 लोग मुस्लिम समुदाय से थे. इस साल के पहले छः महीने में ही गाय या बीफ से सम्बंधित 20 ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं. इस रिपोर्ट के छपने के बाद भी ऐसी एक-दो और घटनाएं हुईं हैं.

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