शांति का नोबेल पुरस्कार: परमाणु हथियारों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली संस्था को

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सौतुक डेस्क/

वर्ष 2017 के शांति का नोबेल पुरस्कार परमाणु हथियार को ख़त्म करने के लिए अभियान चला रही संस्था को मिला.

शुक्रवार को दी इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स (आईसीएएन) को इस साल के शांति के नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई.

यह ऐसे गैर-सरकारी संस्थाओं का एक समूह है जो 100 देशों में फैला हुआ है. सीएएन विश्व की वह प्रमुख संस्था है जो इन परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए कई सालों से प्रयास कर रही है. इसके अनुसार अंतर्राष्ट्रीय कानून के मुताबिक़ सारे परमाणु हथियार नष्ट होने चाहिए.

नोबेल समिति ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए यह कहा कि अब जब इन परमाणु हथियारों के ख़त्म होने पर बात हो तो उन देशों को भी शामिल किया जाए जिन्होंने परमाणु हथियार बनाए और जमा किये हुए हैं.

सनद रहे कि पिछले सात जुलाई को पहली बार विश्व के करीब 122 देशों ने  परमाणु हथियार के विरोध में सहमति बनाई. इन देशों ने न्यूयार्क स्थित सयुंक्त-राष्ट्र के कार्यालय में परमाणु हथियार के निरस्त्रीकरण से सम्बंधित सहमति बनायी थी जिसका प्रयास पिछले 20 वर्षों से चल रहा था.

जब वोटिंग हुई तो संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में निरस्त्रीकरण के पक्ष में कुल 122 देशों का समर्थन मिला. विपक्ष में केवल नीदरलैंड का एक वोट था वहीँ सिंगापुर ने इसमें भाग नहीं लिया था. इस संधि के अनुसार  परमाणु हथियार से संबंधित सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी. जिसमें ऐसे किसी हथियार का विकास, परीक्षण, उत्पादन, निर्माण, अधिग्रहण, परमाणु हथियार या अन्य परमाणु विस्फोटक का भण्डारण सब प्रतिबंधित रहेगा. इसके साथ ही इन हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर प्रतिबन्ध रहेगा.[spacer height=”20px”]
लेकिन इसमें कई बड़े देश शामिल ही नहीं हुए. अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल जैसे परमाणु हथियार रखने वाले नौ देशों में से किसी ने भी इस संधि का समर्थन नहीं किया.  [spacer height=”20px”][spacer height=”20px”]

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