आप पद्मावती पर भिड़ते रहिये, सरकार उधर संसद का एक पूरा सत्र ही गोल करने की फ़िराक में है

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सौतुक डेस्क/

अप्रत्याशित तौर पर जब संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा होना चाहिए था, इस वर्ष अभी देश को यह तक नहीं मालूम है कि यह सत्र चलेगा भी कि नहीं. सामान्यतः नवम्बर में शुरू होकर शीतकालीन सत्र कुछेक सप्ताह तक चलता है. पिछले साल इसी सत्र में कुछ महत्वपूर्ण कानून जैसे मातृत्व अवकाश इत्यादि संसद में पारित हुए थे.

लेकन इस बार सरकार की तरफ से इस शीतकालीन सत्र के दिन को लेकर कुछ भी बताया नहीं जा रहा है. इसको लेकर सत्ता के गलियारों में कानाफूसी तेज हो गई है. सरकारी पक्ष के पास इसके बचाव में कहने के लिए कुछ भी नहीं है इसलिए बस इतना ही कहा जा रहा है कि जल्दी ही शीतकालीन सत्र की घोषणा होगी.

लेकिन खबर यह है कि चूँकि नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम इस साल गुजरात चुनाव प्रचार में रहने वाले हैं इसलिए सरकार की मंशा शीतकालीन सत्र बुलाने की नहीं है. यह भी कहा जा रहा है कि अगर विपक्ष इस पर हंगामा करेगा तो दिसंबर में कम समय के लिए ही सही शीतकालीन सत्र बुला  दिया जाएगा.

कानून यह कहता है कि संसद छः महीने तक लगातार बिना सत्र बुलाये नहीं चल सकता. इसका तात्पर्य यह है कि सरकार फ़रवरी तक कानूनन संसद सत्र नहीं बुलाने के लिए स्वतंत्र है. इससे पहले इस साल अगस्त में मानसून सत्र आयोजित हुआ था. लेकिन परंपरागत तौर पर देखा जाए तो यह संसद के सत्र को लेकर एक बड़ा कदम माना जाएगा.

उधर विपक्ष ने सरकार पर इसके लिए हमला शुरू कर दिया है. कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास संसद का सामना करने की हिम्मत नहीं है. सोनिया गांधी का बतौर कांग्रेस अध्यक्ष 19 साल का कार्यकाल अगले महीने समाप्त होने वाला है.

गाँधी ने आज अपने पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र को न बुलाकर मोदी सरकार ने लोकतंत्र का एक काला अध्याय शुरू किया है. “अगर मोदी सोच रहे हैं कि संसद का सत्र न बुलाकर वो अपने किये की जवाबदेही से बच जायेंगे तो उनका सोचना गलत है”, उन्होंने आगे कहा.

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि इनके पास विपक्ष का सामना करने की हिम्मत नहीं है.

 

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