जानिये क्या क्या है जीएसटी से सम्बंधित जरुरी बात

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सौतुक डेस्क/

भारत में  बड़े गाजे-बाजे के साथ एक देश एक कर 30 जून की रात को 12 बजे संसद के विशेष सत्र बुलाकर अपनाया गया. अभी तक यह चुटकुलों और सवालों का वृहत विषय बना हुआ है. लोग इस जीएसटी सम्बंधित व्योरों को नहीं समझने को लेकर नए नए चुटकुले बना रहे हैं. सौतुक ने राष्ट्रपति के बयान के आधार पर इस को कुछ हद तक समझने समझाने का प्रयास किया है. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा यह बयान जीएसटी के लांच के समय दिया गया.

  • जी एस टी दिसंबर 2002 में प्रारंभ हुई चौदह वर्ष पुरानी यात्रा का परिणाम है जब अप्रत्यक्ष करों के बारे में गठित केलकर कार्य बल ने मूल्यवर्धित कर सिद्धांत पर आधारित विस्तृत वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का  सुझाव दिया था. जीएसटी का प्रस्ताव सबसे पहले वित्त वर्ष 2006-07 के बजट भाषण में आया था. प्रस्ताव में न केवल केंद्र द्वारा लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर में सुधार बल्कि राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों में सुधार भी शामिल था. इसकी डिजायन और इसे लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार करने की जिम्मेदारी राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को दी गई जिसे पहले  मूल्यवर्धित कर(वैट)  लागू करने का दायित्व दिया गया था. अधिकार प्राप्त समिति ने नवंबर, 2009 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर पहला विर्मश पत्र जारी किया.

 

  • जीएसटी की शुरुआत राष्‍ट्र के लिए एक महत्‍वपूर्ण घटना है. बतौर वित्‍तमंत्री मुखर्जी ने ही 22 मार्च 2011 को संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था.  8 सितंबर 2016 को संसद के दोनों सदनों तथा पचास प्रतिशत से अधिक राज्‍य विधानसभाओं द्वारा इस विधेयक को पारित कर दिया गया. इस तरह यह संविधान में एक सौ एकवां संशोधन हुआ.

 

  • संविधान में संशोधन के बाद, संविधान के अनुच्छेद 279 क के प्रावधानों के अनुसार जीएसटी परिषद का गठन किया गया. यह केन्द्र और राज्यों का संयुक्त मंच है जहां केन्द्र और राज्य दोनों ही एक दूसरे के समर्थन के बिना कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं.

 

  •  केन्द्रीय उत्पाद शुल्क का एक लम्बा इतिहास रहा है और केन्द्रीय कोष में यह सबसे अधिक योगदान करने वालों में से एक कर रहा है. इसके बाद आता है सेवा शुल्क जो नया है पर राजस्व के संदर्भ में हाल के वर्षों में इसमें तेजी से बढोतरी हुई है. वस्तु और सेवा कर के दायरे से बाहर कुछ वस्तुओं को छोड़कर अतिरिक्त सीमा शुल्क, विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क और विभिन्न उपकरों और अधिभारों के साथ अब ये दोनों समाप्त हो जाएंगे. वस्तु और सेवा के दायरे में आने वाली वस्तुओं के लिए अंतर राज्यीय बिक्री पर लगने वाला केन्द्रीय बिक्री कर खत्म हो जाएगा.

 

  •  जीएसटी एक आधुनिक विश्‍व स्‍तरीय सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली के जरिए लागू किया जाएगा. जुलाई 2010 में  नंदन नीलेकणी की अध्‍यक्षता में जीएसटी व्‍यवस्‍था के लिए आवश्‍यक आईटी प्रणाली विकसित करने के लिए अधिकार प्राप्‍त दल बनाया था. बाद में अप्रैल, 2012 में सरकार द्वारा जीएसटी लागू करने के लिए एक स्‍पेशल पर्पस व्हिकल- जीएसटीएन (जीएसटी नेटवर्क-) को स्‍वीकृति दी गई.

 

  • इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता यह है कि इनपुट पर दिए गए कर के लिए खरीदार को क्रेडिट तभी मिलेगा, जब विक्रेता द्वारा वास्‍तविक रूप से सरकार को कर भुगतान कर दिया गया हो.  इससे तेजी से बकाया भुगतान करने वाले ईमानदार और व्‍यवस्‍था परिपालन करने वाले विक्रेताओं से व्‍यवहार करने में खरीदारों को प्रोत्‍साहन मिलेगा.

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