मौजूदा सरकार की एक और विफलता: नेपाल करेगा भारतीय सीमा पर ड्रोन से निगरानी

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आदित्य पाण्डेय/

अब नेपाल ने भारतीय सीमा पर ड्रोन से निगरानी करने का निर्णय लिया. यह नेपाल के भारत से दूर होते जाने का एक और प्रमाण हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेश नीति को यह एक और झटके के तौर पर आया है.

सोमवार को नेपाल ने भारतीय सीमा पर निगरानी करने के लिए ड्रोन तैनात करने की घोषणा किया. नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने सोमवार को यह घोषणा की.

गृह मंत्रालय की 82 सूत्रीय सुधार योजना का अनावरण करते हुए उन्होंने संवाददाताओं को बताया, “हमें ड्रोन की उपयोगिता पर वर्तमान दिशा-निर्देशों को बदलने की जरूरत है और अब भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग जरूरी हो गया है.”

उन्होंने कहा, “भारत ने हर किलोमीटर सैन्य चौकी स्थापित की है लेकिन हमने मुश्किल से 25 किलोमीटर में एक चौकी बनाई है. सीमा पर मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हम ड्रोन का उपयोग करेंगे.”

भारत और नेपाल के बीच लगभग 18,000 किलोमीटर की खुली सीमा है जिसे बिना किसी अनुमति के पार किया जा सकता है.

सीमा पर रह रहे लोगों को इसे पार करने के लिए जहां किसी पहचान पत्र की जरूरत नहीं है तो पर्यटकों को इसे पार करने के लिए वैध पहचान पत्र दिखाना पड़ता है.

चीन से लगने वाली सीमा बहुत बड़ी होने के बावजूद थापा ने अपने भाषण में सिर्फ भारत का नाम लिया.

सीमा पर निगरानी को कड़ा करने पर जोर देते हुए थापा ने कहा कि नई आव्रजन नीति लाई जाएगी और विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी.

थापा ने भारत और चीन सीमा पर 10 और चौकियां स्थापित करने का घोषणा की लेकिन उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.

नेपाल मानव तस्करी और मादक पदार्थो की तस्करी जैसे सीमा पर होने वाले कई अपराधों से परेशान है. वहीं भारत को भी नेपाल सीमा पर यही समस्या है.

पड़ोस में अलग थलग पड़ता भारत

नरेन्द्र मोदी देश के कुछ गिने चुने प्रधानमंत्री में से हैं जिन्होंने सत्ता में आते ही अन्य देशों से रिश्ते को काफी तरजीह दिया. मोदी ने प्रधानमंत्री पद के शपथग्रहण समारोह में भी पडोसी देश के सत्तासीन लोगों को आमंत्रित किया था. उन्होंने सत्ता में आते ही ‘पड़ोसी मुल्कों को तरजीह’ देने की बात की थी. अपने बाकि के कार्यकाल में भी अधिकतर समय विदेशी यात्रा पर ही गया. यहाँ तक कि लोग उनका मजाक बनाने लगे. लेकिन इन सारे प्रयास का कहीं कुछ ख़ास असर नहीं होता दिख रहा है.

यहाँ तक की पडोसी मुल्क भी जिनके भारत से अब तक अच्छे सम्बन्ध रहे हैं वे भी धीरे धीरे दूरी बनाने में लगे हैं. एक तरफ पाकिस्तान से सम्बन्ध खराब ही है, दूसरी तरफ श्रीलंका, मालदीव और अब नेपाल भी चीन की तरफ झुकते नजर आ रहे हैं. सामरिक मामले में देखा जाए तो चीन इन देशों में भारी निवेश करते हुए भारत की चारों तरफ से घेराबंदी करता नज़र आ रहा है और भारत सरकार को समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे चीन की इस कुटनीतिक बढ़त का जवाब दें.

आलम यह आ गया है कि हाल ही में भारत को चीन के मालदीव में हस्तक्षेप नहीं करने सफाई देनी पड़ी. इन्ही सारी चीजों को देखते हुए शायद देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही में आयोजित कांग्रेस के महाधिवेशन में पड़ोसी देशों से बिगड़ते सम्बन्ध पर चिंता जाहिर की और इसे सुधारने पर बल दिया.

–आईएएनएस के इनपुट के साथ

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