सरदार सरोवर परियोजना: ‘मोदी का इवेंट फेल’

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फोटो: बिजनेस लाइन से साभार

सौतुक डेस्क/

पिछले कई सालों से गुजरात में नरेन्द्र मोदी या उनके बैठाए गए लोगों का शासन रहा है पर अब भी 41 हजार किलोमीटर की सरदार सरोवर परियोजना से जुड़ी नहर नहीं बन पाई है, यह सवाल नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने बयान जारी कर उठाया है.

गुजरात में सरदार सरोवर बांध को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने पूरा बताते हुए लोकार्पण बड़े जोश से आयोजित किया था. वह एक प्रकार से वैसा ही अधूरा रह गया जैसे सरदार सरोवर परियोजना भी अधूरी रह गयी है. नर्मदा बचाओ आन्दोलन ने अपने बयान में कहा.

इस आन्दोलन के अनुसार,  पूरे देश के मुख्यमंत्रियों को उन्होंने बुलावा देने की बात गुजरात से बार-बार ज़ाहिर की थी . लेकिन मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित कोई भी मुख्यमंत्री उस कार्यक्रम में नही पहुंचा, यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है.

वाराणसी से दो हजार साधुओं की महाआरती में सहभागिता होनी थी,लेकिन उनके आने की कोई खबर नही हैं. देश कई हिस्सों, जैसे भोपाल, इंदौर, वाराणसी, गुना, जबलपुर. लखनऊ, वाराणसी, पुणे, मुंबई, जयपुर, तेलंगाना, हैदराबाद और गुजरात के केवड़िया कॉलोनी तथा वडोदरा सहित कई शहरों में नर्मदा बचाओ आन्दोलन के समर्थकों ने आवाज़ उठाई तथा इस लोकार्पण के विरोध में धरना, रैली तथा उपवास किया.

विकास के मुद्दे पर, समता और न्याय के पक्ष में रहने वाले इस देश के नागरिक नर्मदा बचाओ आन्दोलन के विचार और सत्याग्रह के साथ खड़े हैं.

उसी वक्त जबकि वहां महा आरती का ऐलान था, नर्मदा घाटी के हज़ारों लोगों ने चुनौती दी कि  इस बाँध को नर्मदा घाटी के लोग सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं बल्कि लाभों के न्यायपूर्ण बंटवारे की दृष्टि से भी असफल मानते हैं.

मोदी ने सरदार सरोवर बाँध को सिविल इंजीनियरिंग का एक चमत्कार बताया है . इस बाँध और नहरों के जाल को मोदी जी और उनकी पार्टी गुजरात में सालों सत्ताधीन रहने के बावजूद–अबतक करीब 41 हज़ार किलोमीटर का नहर निर्माण जिसके बिना गुजरात के खेतों में पानी जाना नहीं हो सकता–पूरा नहीं करवा पाई है.नहरों के जाल की लम्बाई के आधार पर  सरदार सरोवर को एक ओर दुनिया का दूसरे नंबर का बाँध घोषित कर रहे हैं और दूसरी ओर कम से कम 3 दशकों के बाद नहर जाल पूरा हुआ है यह सबसे बड़ा विरोधाभास है .

मोदी जी ने लाभों का बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन करते हुए मध्यप्रदेश को सरदार सरोवर से 56%  बिजली देने की बात का वर्णन किया.  लेकिन वर्तमान में मध्यप्रदेश को बिजली की ज़रूरत न होते हुए और अधिक बिजली देना, कोई मायने नहीं रखता. महत्त्व इस बात का है कि मध्यप्रदेश के 192 गाँव व एक नगर के लोगों की जल-जंगल आबादी व आजीविका भी छिनने के बावजूद एक बूंद पानी पर भी मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र को इस बाँध से अधिकार नहीं मिला.

 

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