मोदी का कैबिनेट विस्तार, नौ नए चेहरे शामिल

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नरेन्द्र मोदी

सौतुक डेस्क/

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने कैबिनेट का विस्तार किया जिसमें चार राज्यमंत्रियों को प्रोमोशन हुआ है और नौ नए चेहरे बतौर राज्यमंत्री शामिल हुए. नीतीश कुमार के जनता दल (यू) को जगह नहीं मिली.

चार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जिनको अच्छे काम के लिए प्रोमोशन मिला है, वे हैं- मुख्तार अब्बास नकवी, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेन्द्र प्रधान. इनमे सबसे पहले धर्मेन्द्र प्रधान को शपथ दिलाई गई जिसके बाद पीयूष गोयल ने शपथ लिया.

इनके अतिरिक्त नौ चेहरे नए बतौर राज्यमंत्री शामिल किये गए इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल इत्यादि के नेता शामिल किये गए.

इनमे सबसे पहले शपथ लिया शिव प्रताप शुक्ल ने जो  गोरखपुर से आते हैं. शुक्ल फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सदस्य हैं और इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में आठ साल मंत्री रहे हैं. इनके बारे में बताया जाता है कि यह इमरजेंसी में मीसा के तहत जेल गए थे.

उनके बाद शपथ लिया अश्विनी कुमार चौबे ने जो केंद्रीय सिल्क बोर्ड के सदस्य हैं. ये बिहार के बक्सर से लोकसभा के सदस्य भी हैं. ये शौचालय बनवाने के अभियान से भी जुड़े रहे हैं. चौबे बिहार में लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं.

इनके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से आने वाले वीरेन्द्र कुमार ने भी बतौर राज्यमंत्री शपथ लिया. ये टीकमगढ़ से ही सांसद हैं. दलित समुदाय से आने वाले कुमार भी आपातकाल के दौरान ‘मीसा’ के तहत जेल में रहे हैं.

कर्नाटक से आने वाले अनंत कुमार हेगड़े को भी राज्यमंत्री बनाया गया है. हेगड़े उत्तर कन्नडा से लोकसभा सदस्य हैं . ये 28 साल की उम्र में ही पहली बार लोकसभा का चुनाव जीत गए थे.

बिहार काडर के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आर के सिंह ने भी बतौर राज्य मंत्री शपथ ली. इससे पूर्व ये देश के गृह सचिव भी रह चुके हैं. ये बिहार के आरा से लोकसभा सदस्य है.

राज्यमंत्री बने हरदीप सिंह पूरी ने भी ली शपथ. ये सुरक्षा परिषद् में भारत का नेतृत्व कर चुके हैं . विदेश सेवा में जाने से पहले इन्होने दिल्ली के एक कॉलेज में पढाया भी था.

गजेन्द्र सिंह शेखावत जोधपुर से लोकसभा सदस्य हैं. इन्होने भी राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली. शेखावत सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं.

सत्यपाल सिंह को भी राज्यमंत्री बनाया गया. ये उत्तर प्रदेश के बागपत से लोकसभा के सदस्य हैं. इन्होने नक्सलवाद पर पीएचडी की है. इन्हें राज्य गृहमंत्री का दावेदार माना जा रहा है.

केजे अलफोंस केरल काडर के प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं. इन्होने भी राज्यमंत्री के बतौर शपथ ली.

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