‘पारदर्शिता’ की पैरोकार मोदी सरकार राफेल समझौते का ब्यौरा देश को नहीं बतायेगी

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सौतुक डेस्क/

करदाता का पैसा, अपनी चुनी हुई सरकार और वह भी वह सरकार जो सत्ता में सिर्फ और सिर्फ पारदर्शिता लाने के नाम पर आई हो. वही सरकार फ़्रांस के साथ हुए एक रक्षा सौदों का ब्यौरा देशवासियों को नहीं देगी. इस रक्षा सौदे पर पहले ही कई प्रश्न उठ चुके हैं जिसमें कम कीमत पर हुए पुराने राफेल डील को निरस्त कर सरकार ने महंगे दाम पर पुनः सौदा किया. जब संसद में उनसे इसका ब्यौरा माँगा गया तो इन्होने यह कहकर देने से मना कर दिया कि यह संवेदनशील मामला है और फ्रांस सरकार से हुए सहमति के अनुसार इसके ब्योरे साझा नहीं किये जा सकते.

यह बात किसी और ने नहीं बल्कि देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कही.

वर्तमान सरकार पर पहले से आरोप है कि इसने अनिल अम्बानी की कंपनी को इसमें फायदा पहुंचाया है. अलबत्ता सरकार और रिलायंस डिफेंस ने इस आरोप को पुरजोर तौर पर खारिज किया है.

कांग्रेस ने वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि यह सरकार फ़्रांस के साथ हुए राफेल समझौते में अनिल अम्बानी की कामनी को मुनाफा पहुंचाना चाहती है. इसके लिए इस सरकार ने पहले हुए समझौते को निरस्त कर कई गुना अधिक दाम पर फिर समझौता किया. कांग्रेस के अनुसार मनमोहन सिंह सरकार ने यही समझौता किया था जिसमें भारत को फ़्रांस से एक राफेल लड़ाकू विमान महज 526.1 करोड़ में मिलना था. जब नरेन्द्र मोदी सत्ता में आये तो उन्होंने इस सौदे को रद्द कर दिया और नया समझौता किया. अब देश को यही विमान 1,570 करोड़ में मिलना है.

देश को  एक राफेल लड़ाकू विमान पुराने समझौते के अनुसार महज 526.1 करोड़ में मिलना था वही विमान अब 1,570 करोड़ में मिलेगा

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में फ्रांस से हुए लड़ाकू विमान ‘राफेल’ के सौदे को गोपनीय जानकारी बताते हुए इसकी जानकारी सार्वजनिक करने से मना किए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस सौदे को गोपनीय रखने खातिर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की. राहुल ने एक ट्वीट कर कहा, “अतिगोपनीय रक्षामंत्री कहती हैं कि प्रधानमंत्री और उनके ‘विश्वसनीय’ साथी द्वारा प्रत्येक राफेल जेट का मोल-भाव करना गोपनीय है.”

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में आगे कहा, “विचारणीय बिंदु- संसद को सौदे की कीमत बताना राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है और पूछने वाला देशद्रोही.”

समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद नरेश अग्रवाल द्वारा भारत-फ्रांस समझौते के अनुच्छेद-10 का हवाला देते हुए सौदे को गोपनीय रखने का कारण पूछे जाने पर निर्मला ने लिखित जवाब दिया था. भारत और फ्रांस के बीच वर्ष 2008 में हुए समझौते में कहा गया था कि दोनों देशों के बीच गोपनीय जानकारी और तथ्य साझा किए जाएंगे.

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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