नेहरु या मोदी जैकेट: क्या बस नाम बदलकर अपना बताने की उस्ताद है सरकार?

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अनिमेष नाथ/

बीते 31 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने नरेन्द्र मोदी का भेजा जैकेट पहनकर ट्वीट किया. इस मोदी जैकेट की तारीफ करते हुए उन्होंने भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री को गिफ्ट के लिए शुक्रिया अदा किया. पर इस ट्वीट पर अधिकतर भारतीयों को ख़ुशी की जगह आश्चर्य हुआ कि सालों से प्रचलित नेहरु जैकेट,  मोदी जैकेट कब हो गया! ट्वीटर पर लोगों ने इस ट्वीट की काफी खिल्ली उड़ाई. कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने दो कदम आगे जाते हुए यह तक कह दिया कि नरेन्द्र मोदी सरकार सोचती है कि किसी चीज पर नया लेबल लगा दो और वह अपने आप उनकी हो जाती है.

थरूर ने पहले भी मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया था कि यह काम की नहीं बस नाम की सरकार है जिसे नई योजना बनाने से अधिक उनका नाम बदलकर अपना बताने में दिलचस्पी है.

इन्होंने 2017 में कहा था कि मोदी सरकार की 23 नई योजनाओं में से 19 तो कांग्रेस सरकार की लाई हुई योजनाएं हैं. मोदी ने बस उनका नाम बदल दिया है. आईये देखते हैं मोदी सरकार ने सयुंक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की कौन-कौन सी योजनाओं को सिर्फ नाम बदल कर अपना बता दिया:

1- प्रधानमन्त्री जन धन योजना: इसके पहले एक ऐसी ही योजना थी जिसका नाम था बेसिक सेविंग बैंक डिपाजिट एकाउंट(BSBDA). इस योजना में भी कोई न्यूनतम जमा राशि की बाध्यता नहीं थी. इस खाते में एटीएम सुविधा भी प्रदान की गयी थी और आरबीआई द्वारा 17 अक्टूबर 2012 में जारी निर्देशों के अनुसार इन खातों से, एटीएम के माध्यम से 4 बार राशि निकलने की सीमा तय की गयी थी.

2- बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ: पिछली सरकार में इसी से मिलती जुलती एक योजना थी जिसका नाम था नेशनल गर्ल चाइल्ड प्रोग्राम. कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने वर्ष 2008-09 में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बेटी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया. वर्तमान सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना’ को बाल लिंग अनुपात में सुधार और लड़कियों के बीच में स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया. इन उद्देश्यों के लिए पिछली सरकार में धनलक्ष्मी और सबला योजनाएं थीं. बाद में धनलक्ष्मी योजना को बंद कर दिया गया क्योंकि देश में पहले से कई योजनाएं मौजूद थीं.

3- स्वच्छ भारत अभियान: इस अभियान के उद्देश्य के लिए मनमोहन सिंह सरकार में  निर्मल भारत अभियान के नाम से एक योजना थी. सितम्बर 2014 में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी कि निर्मल भारत अभियान योजना, स्वच्छ भारत अभियान में पुनर्गठित की जायेगी.

4- सरदार पटेल  राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन: मोदी सरकार की इस योजना से मिलती-जुलती राजीव आवास योजना थी जिसका नाम मोदी सरकार ने बदला. पायनियर अखबार ने 10 अक्टूबर 2014 को आवास और गरीबी उन्मूलन मंत्री वेंकैया नायडू का हवाला देते हुए लिखा था, “सरकार जल्द ही मौजूदा शहरी आवास योजनाओं में विलय और सुधार करके सरदार पटेल राष्ट्रीय आवास मिशन नामक एक व्यापक कार्यक्रम शुरू करने जा रही है.”

5- प्रधानमन्त्रीआवास योजना(ग्रामीण): कांग्रेस सरकार में इस योजना का नाम इंदिरा आवास योजना था. 31 अगस्त 2016 को तत्कालीन संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था, कि इंदिरा आवास योजना को अब प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के नाम से जाना जायेगा.

6- दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना: पिछली सरकार में इस योजना का नाम राजीव ग्रामीण विद्युतीकरण योजना था. 23 जुलाई 2015 को एक सरकारी रिलीज़ के अनुसार, संप्रग सरकार की राजीव ग्रामीण विद्युतुकरण योजना का दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में विलय कर दिया गया.

7- कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन: यह कांग्रेस सरकार के जवाहर लाल नेहरु राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन का नया रूपांतरण है. 25 जून 2015 को कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन(AMRUT), स्मार्ट सिटी मिशन और प्रधानमन्त्री आवास योजना(शहरी) को लांच किया गया था.

8- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: इस योजना की परछाई पिछली सरकार के त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम में दिखती है. इस योजना वेबसाइट के अनुसार जल संसाधन मंत्रालय के त्वरित सिंचाई कार्यक्रम, भूमि संसाधन मंत्रालय के एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम और सहयोग विभाग के कृषि जल प्रबंधन कार्यक्रम को एनडीए सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में विलय कर दिया गया.

9- भाजपा का नीम कोटेड यूरिया: इस तर्ज पर संप्रग सरकार में भी एक योजना थी. राष्ट्रीय उर्वरक वेबसाइट के मुताबिक 1985 में आये उर्वरक(नियंत्रण)आदेश के अनुसार, 2004 में नीम कोटेड यूरिया को शामिल किया गया था. परन्तु 2 जून 2008 को इसे अधिसूचित किया गया था .

10- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना:  वर्ष 2015-16 के कृषि और सहयोग विभाग के बजट के मुताबिक मृदा स्वास्थ्य और उपजाऊ क्षमता के प्रबंधन पर चल रही राष्ट्रीय परियोजना में एक “मृदा स्वास्थ्य कार्ड” को जोड़ा गया था. लोकसभा में दिए गए उत्तर के मुताबिक, केंद्र सरकार मृदा स्वास्थ्य जारी करने वाले राज्यों को अपना समर्थन प्रदान करेगी.  यूपीए सरकार के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैविक खेती कार्यक्रमों हेतु जारी किये गए थे पर इस योजना को भी एनडीए की मृदा स्वास्थ्य कार्ड नाम की योजना में विलय कर दिया गया.

11- परंपरागत कृषि विकास योजना: इस योजना का हमशक्ल पिछली सरकार के राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को मान सकते हैं.

12- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना: पिछली सरकार में इस योजना का नाम इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना था. इन दोनों योजनों में गर्भवती महिलाओं को सरकार आर्थिक मदद करती है. पुरानी सरकार में यह योजना कुछ 50 के करीब जिलों में बतौर पायलट चलाया जा रहा था. इस सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार आदेश देने पर इसे पूरे देश में लागू किया पर इसमें भी खेल खेलते हुए इस योजना का लाभ पहले बच्चे तक सीमित कर दिया.

13- अटल पेंशन योजना: इसकी तुलना मनमोहन सिंह सरकार के  स्वावलंबन योजना से की जा सकती है. कांग्रेस की स्वावलंबन योजना  29 सितम्बर 2010 को शुरू हुई.

14- प्रधानमन्त्री जन औषधि योजना: संप्रग सरकार में इस योजना का नाम जन औषधि योजना था. पिछली सरकार ने 23 अप्रैल 2008 को बिना ब्रांड की दवाइयों (जेनेरिक दवा) को कम दाम में बेचने का निर्णय लिया था. इस योजना के तहत पहला स्टोर 25 नवम्बर 2008 को खोला गया. वर्तमान सरकार ने इसका नाम बदल दिया.

15- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: संप्रग सरकार में इसका नाम यह कम्प्रिहेंसिव क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम था जिसका उद्देश्य किसानों की फसल बीमा कराना था. अलबत्ता दोनों सरकारों में किसानों को इसका लाभ मिलता नहीं दिखता है.

16- मेक इन इंडिया: स्थानीय उत्पादन को बढाने के लिए मनमोहन सिंह सरकार के समय में नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पालिसी थी.

17- डिजिटल इंडिया: इसकी जगह पुरानी सरकार में नेशनल इ-गवर्नेंस प्लान था.

18- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना: इसके बदले पुरानी सरकार में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के नाम से एक योजना थी जिसका उद्देश्य लगभग वही था जो वर्तमान योजना का है.

19- पहल योजना: मनमोहन सिंह सर्कार ने 1 जून 2013 में ही प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर) के नाम से योजना की शुरुआत की थी. सरकार की योजना थी कि एलपीजी गैस से जुड़े इस कार्यक्रम को 2014 में आगे बढाया जाएगा.

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