विवादित अधिकारी के सेवानिवृत होने के बाद प्रधानमंत्री ने किया हस्तक्षेप, बढ़ाया कार्यकाल

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शिखा कौशिक/

कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष असीम खुराना जिनके इस्तीफे की मांग दो साल से चल रही है, को कार्यकाल पूरा होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप से फिर से काम करने का मौका दिया गया है. असीम के इस्तीफे की मांग दो साल पहले हुए पेपर लीक के बाद से ही हो रही थी.

रिपोर्ट के मुताबिक़ कानून मंत्रालय और संघ लोक सेवा आयोग ने लिखित तौर पर इस पर आपत्ति भी जताई थी. इन सब बातों का खुलासा ‘सूचना के अधिकार’ के तहत प्राप्त जानकारी से हुआ है.

अलबत्ता, इस सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब में उस पन्ने को नहीं दिया गया है जिसपर प्रधानमंत्री से जुड़े हस्तक्षेप के सबूत मौजूद हैं. यह वजह बताकर कि यह गोपनीय दस्तावेज है.

हाल ही में हुए एक पत्रकार वार्ता में इन दस्तावेजों को साझा करते हुए युवा हल्ला बोल के नेता अनुपम ने आरोप लगाया कि “खुराना के कार्यकाल को अवैध और असंवैधानिक रूप से बढ़ाकर, प्रधानमंत्री देश की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी में भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं.”

अंग्रेजी अखबार ‘दी हिन्दू’ से बात करते हुए बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले 23 वर्षीय कन्हैया कुमार का कहना है कि पेपर लीक की सीबीआई जांच अभी भी पूरी नहीं हुई है.इसकी वजह से हजारों छात्र बेरोजगार बैठे हैं. लेकिन प्रधानमंत्री केवल खुराना की नौकरी की रक्षा करना चाहते हैं, बेरोजगार बैठे नौजवानों की नहीं. कन्हैया कुमार ने ही सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी.

गुजरात कैडर के इस आईएएस अधिकारी का कार्यकाल 12 मई को पूरा हो गया और नियम से ये 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त भी हो गए. इसके दो दिन बाद यानी 14 मई को एक समिति जिसमें मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह दोनों शामिल हैं, ने खुराना का कार्यकाल एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया

कन्हैया उन 1.9 लाख युवाओं में से एक हैं जो एसएससी द्वारा पिछले साल फरवरी में आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा में शामिल हुए थे. पेपर लीक और सामूहिक धोखाधड़ी की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई थी. इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ.

तभी से खुराना के इस्तीफे की मांग उठ रही थी. गुजरात कैडर के इस आईएएस अधिकारी का कार्यकाल 12 मई को पूरा हो गया और नियम से ये 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त भी हो गए. इसके दो दिन बाद यानी 14 मई को समिति, जिसमें मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह दोनों शामिल हैं, उन्होंने खुराना का कार्यकाल एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया. खुराना के कार्यकाल को सही साबित करने के लिए मोदी के नेतृत्व वाली समिति ने अध्यक्ष पद के लिए आयु सीमा को बढ़ाकर 65 वर्ष भी कर दिया.

इसके बाद कार्मिक एवं शिक्षण विभाग ने एक संशोधन कर यह सुनिश्चित किया कि मोदी के नेतृत्व वाली इस समिति के नियम दो दिन पहले सेवानिवृत हुए खुराना पर भी लागू हों. जबकि नियम के मुताबिक़ ऐसा नहीं होता है.  इस तथ्य का खुलासा उसी सूचना के अधिकार से मिली जानकारी से हुआ है. उसमें प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप वाली सूचना को यह कहकर नहीं दिया गया है कि यह गोपनीय है.

राजनीतिज्ञ और किसान नेता योगेन्द्र यादव ने मीडिया वालों से बात करते हुए कहा है कि इसमें कौन सी राष्ट्र और देश की सुरक्षा की बात है कि इसे गोपनीय करार दिया गया है. इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि नरेन्द्र मोदी एक भ्रष्ट अधिकारी को सरंक्षण दे रहे हैं.

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