मायावती ने राज्यसभा से दिया इस्तीफ़ा, कहा दलित उत्पीड़न पर संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा

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सौतुक डेस्क/
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले दिन में, संसद में न बोलने की अनुमति मिलने पर उन्होंने इस्तीफ़ा देने की धमकी दी थी. वे उत्तर प्रदेश  के सहारनपुर में दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के बारे में सदन में बोलना चाहती थीं. जब राज्यसभा उपाध्यक्ष ने उनसे अपनी बात ख़तम करने को कहा तो उन्होंने  सदन छोड़ने की धमकी दी थी.
बसपा सुप्रीमो के इस्तीफे के तुरंत बात राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने मायावती से बात की है और उनसे निवेदन किया है कि आप बिहार से राज्य सभा का सदस्य बनिए और भाजपा के द्वारा किये जा रहे जुल्म और बाँटने की राजनीति के खिलाफ लड़िये. अब देखना है कि मायावती लालू प्रसाद यादव के इस सुझाव पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं.
सनद रहे कि अगले साल मार्च में मायावती की  राज्यसभा की सदस्यता ख़त्म हो जायेगी. उनके पास अभी इतने विधायक नहीं हैं कि वह अपने राजनितिक दल के बूते दोबारा से राज्यसभा की सदस्यता पा सकें. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कुछ लोगों ने इस मुद्दे को ऐसा देखा कि उनको वैसे भी वापस नहीं आना था तो उन्होंने इसे एक राजनितिक रंग  देकर इस्तीफ़ा दे  दिया.
अलबत्ता मायावती ने इस्तीफे के बाद संवाददाताओं से कहा, “जब मुझे सदन में बात करने के लिए समय नहीं दिया जा रहा है, तो इससे बेहतर तो यह है  की मैं इस्तीफा  दे दूँ.” उन्होंने फेसबुक पर यह भी लिखा कि सहारनपुर में दलितों के साथ क्या हो रहा है अगर वह देश के सबसे बड़े सदन में नहीं बतायेंगी तो कहाँ बतायेंगी. उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आगे लिखा कि अगर सदन इसकी इजाजत नहीं देगा तो फिर इस सदन में रहने का क्या मतलब है.
सोमवार को शुरू हुए मानसून सत्र में मायावती सहारनपुर में हिंसा के के मुद्दे  को उठाना  चाहती थीं. लेकिन, जब उपाध्यक्ष पीजे कुरियन ने उन्हें अपने भाषण को कम करने के लिए कहा, तो वह संसद से बाहर चली गईं.
संसद छोड़ने के बाद मायावती ने संवाददाताओं से कहा, “मुझे सदन में तीन मिनट बोलने को कहा गया था।” “मैंने सदन को बताया कि यह शून्य काल नहीं है, और मैं तीन मिनट से ज्यादा बोल सकती हूँ… लेकिन उपाध्यक्ष ने मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी।”
वहीँ दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बीएसपी प्रमुख से, सत्र के बीच में संसद छोड़कर बाहर जाने के लिए माफी की मांग की.
हालांकि, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि मायावती ने गंभीर मामलों को उठाया था. उन्होंने कहा, “सरकार दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ  हो रहे अत्याचार के बारे में कुछ नहीं कर रही है जो गंभीर खतरे का संकेत है.

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