मैं भी चौकीदार: अगर यह चौकीदारी है तो चोरी क्या है!

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उमंग कुमार/

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को देश के पहले लोकपाल के रूप में सेवानिवृत न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शपथ दिलाई. यह करीब पचास साल से भी लम्बे प्रयास का नतीजा है कि देश में लोकपाल वास्तविक स्वरुप ले पाया.

सन् 1966 में पहली बार प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा सिफारिश किए जाने से लेकर, 2011 तक लोकपाल कानून, वास्तविक रूप लेने का आठ बार असफल प्रयास देख चुका था. लोकपाल को लेकर फिर वास्तविक संघर्ष शुरू हुआ जिसमें अन्ना हजारे की भूख-हड़ताल भी शामिल है. इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने जन लोकपाल बिल के लिए ख़ास संसद सत्र की मांग की.

जन लोकपाल विधेयक 2014 के चुनाव अभियान का एक प्रमुख हिस्सा था. उस वर्ष इस उम्मीद में यह विधेयक  पारित किया गया था कि लोकपाल संस्थागत भ्रष्टाचार पर एक निष्पक्ष निगरानी करता रहेगा. लेकिन नरेन्द्र मोदी जो इसी आन्दोलन के सीढ़ी का इस्तेमाल करते संसद में पहुंचे उन्होंने लोकपाल नियुक्त करने में पांच साल लगा दिए. लोकपाल की नियुक्ति तब हुई है जब अगले लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है.

जो सरकार पांच साल तक लोकपाल के गठन को स्थगित करती रही. न्यायालय के फटकार के बाद मजबूरन किया भी तो अपने कार्यकाल ख़त्म होने के समय किया और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती

इस कहानी की अगली कड़ी में यह भी नहीं कहा जा सकता कि चलो देर आये दुरुस्त आये. प्रधानमंत्री की अगुवाई में चयन समिति ने न्यायमूर्ति घोष का नाम लिया और उसके तुरंत बाद देश के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने इस पर सवाल खड़ा कर दिया. सनद रहे कि भूषण की संस्था कॉमन कॉज ही सर्वोच्च न्यायालय में लोकपाल के लिए संघर्ष कर रही थी.

उन्होंने ट्वीट कर के पूछा कि देश के पहले लोकपाल बनने की दौड़ में कौन-कौन शामिल था उनके नाम सरकार ने सार्वजनिक क्यों नहीं किया? उन्होंने आरोप लगाया कि लोकपाल की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई है.

जो सरकार पांच साल तक लोकपाल के गठन को स्थगित करती रही. न्यायालय के फटकार के बाद मजबूरन किया भी तो अपने कार्यकाल ख़त्म होने के समय किया और इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती.

यह वही सरकार है जो आजकल ‘मैं भी चौकीदार’ नाम से कैंपेन कर रही है. लोगों को बताना चाहती है कि इनके इरादे एकदम नेक है. लेकिन उपरोक्त जानकारी के बाद यह मानना थोड़ा मुश्किल है.

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