कश्मीर में पिछला दो साल सुरक्षाकर्मियों के लिए रहा भारी

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सौतुक डेस्क/

कश्मीर में पिछले दो साल सुरक्षाकर्मियों पर भारी गुज़रे  है.  सरकारी आंकड़ो के अनुसार वर्ष 2016 में कुल 86 सुरक्षाकर्मीयों ने अपनी जान गंवाई और वर्ष 2017 में 9 जुलाई तक कुल 38 जवान शहीद हो चुके हैं. आपको बताते चलें कि  वहीं  यह आंकड़ा वर्ष 2012 में  महज 15 के साथ सबसे कम था.

आतंकवादियों के लिए भी ये दोनों साल काफी भारी रहे हैं. वर्ष 2016 में जहां 150 आतंकवादी मारे गए वहीं इस साल अब तक कुल 95 आतंकवादी मारे जा चुके  हैं.

राज्यसभा में देश के गृह राज्य मंत्री  हंसराज गंगाराम अहीर ने बताया कि इन सात सालों में सबसे अधिक आतंकवादी घटनाएं 2011 में हुई थीं. उस साल कुल 340 आतंकी हिंसा की वारदातें दर्ज़ की गयी थीं, जिनमे 33 सुरक्षाकर्मी और 31 आम नागरिकों की जान चली गई थी. उस साल मारे जाने वाले आतंकियों  संख्या 100 थी. इसके बाद सबसे अधिक 322 आतंकी हिंसा की घटनाएं वर्ष 2016 में हुई जिसमे 15 आम नागरिकों की जान गई और 82 जवान शहीद हुए. इस साल कुल 150 आतंकवादी मारे गए थे.

इस साल जुलाई की शुरआत तक कुल 172 आतंकी घटनाएं हो चुकीं है जिसमे 12 आम नागरिकों की जाने गईं हैं और कुल 38 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. वहीं 95 आतंकवादी भी मारे गए हैं.

वर्ष 2015 में कुल 208 आतंकी घटनाएं हुई जिसमें 17 आम नागरिक और 39 जवानों की जानें गई. उस साल कुल 108 आतंकी मारे गए थे. वर्ष 2014 में कुल आतंकी घटनाएं 222 हुईं थी जिसमे 28 आम नागरिक हताहत हुए थे. कुल 47 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 110 आतंकी मारे गए थे.

पिछले सात सालों में सबसे शांत वर्ष 2013 रहा जिसमे सिर्फ 170 घटनाएं घटी, 15 आम नागरिक, 53 सुरक्षाकर्मी और 67 आतंकी मारे गए थे. वर्ष 2012 में 220 आतंकी घटनाएं हुई थी जिसमे  15 आम लोग और उतने ही सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. मारे गए आतंकियों की संख्या 72 थी.

देश के गृह राज्य मंत्री ने देश के अन्य तनावग्रस्त इलाकों की भी जानकारी डी. उनके अनुसार वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों में पिछले तीन वर्षों के दौरान (जुलाई 2014 से जुलाई 2017) हिंसा की घटनाओं में पहले के तीन वर्षों (जुलाई 2011 से जून 2014) की तुलना में 22.25 प्रतिशत (3999 से 3109) की कमी आई. वहीं वामपंथी उग्रवादियों के मारे जाने की संख्या में पिछले तीन वर्षों (जुलाई 2011 से जून 2014) की तुलना में 78 प्रतिशत (228 से 406) की बढोतरी हुई.

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