न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा बने उच्चतम न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश

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सौतुक डेस्क/

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक समारोह में उच्चतम न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में की शपथ लिया. मिश्रा ने राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के समक्ष पद की शपथ ली.

अक्टूबर 3, 1953 में जन्मे दीपक मिश्रा का कार्यकाल इसी तारिख को वर्ष 2018 में ख़त्म होगा. न्यायमूर्ति मिश्रा ने 14 फरवरी 1977 में उड़ीसा हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. वर्ष 1996 में उन्हें उड़ीसा हाईकोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया और बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर किया गया.

नवंबर 30, 2016 को दिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि पूरे देश में सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए और इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोगों को  राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होना होगा.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने पर जस्टिस दीपक मिश्रा को बधाई दी है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं जस्टिस दीपक मिश्रा को भारत के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने पर बधाई देता हूं. मैं उन्हें सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देता हूं.

राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में सोमवार सुबह आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने न्यायमूर्ति मिश्रा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई.

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