करेंसी की यात्रा: बार्टर सिस्टम से क्रेडिट कार्ड और अब बिटकॉइन तक 

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शिखा कौशिक/ 

आज दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी की बात हो रही है. कोई बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी को ही भविष्य बता रहा है तो कोई इसे एक तात्कालिक बुलबुला बता कर खारिज कर रहा है. पेटीएम, मोबीक्विक, एयरटेल मनी जैसे वर्चुअल मनी से तो आज हम रोज रु-ब-रु हो ही रहे हैं. लेकिन आपने कभी सोचा है कि करेंसी जैसी चीज का आविष्कार  कब और क्यों हुआ होगा और इस करेंसी की यात्रा कितनी लम्बी रही है.

आज के वर्तमान लेन-देन के तरीके से तो यह स्पष्ट होता है कि पैसा अपने आप में कोई मायने नहीं रखता. जब तक लेने और देने वाला उसको एक बराबर मूल्य की कोई चीज ना माने. यह कुछ भी होसकता है जैसे कोई द्रव्य (मेटल), सिक्का, कागज़ का टुकडा इत्यादि जिसका अपना कोई वास्तविक मूल्य नहीं है. यह बस एक माध्यम है जिससे हम एक ख़ास मात्रा में चीजों का अदला-बदली करते हैं. और इससे हिसाब लगाने में सहूलियत होती है. इसको समझने से यह समझ में आता है कि मनुष्य के जीवन में करेंसी की जरुरत क्यों पड़ी होगी और फिर उसके विकास के नए-नए रूप ईजाद हुएहोंगे.

करेंसी के इतिहास से जुडी कुछ जरुरी बातें

बार्टर सिस्टम और सिक्के का जन्म

पृथ्वी पर इंसान की शुरूआती सामाजिक  जिंदगी में जब लेन-देन की जरुरत महसूस हुई, तो सामान के बदले सामान लिया दिया जाता रहा. इसे अंग्रेजी में बार्टरिंग सिस्टम कहा जाता है. जबसे लोगठहर कर जीवन यापन करने लगे, जीव जंतु पालने लगे, सब्जियां उगाने लगे, तब से विश्व स्तर पर बार्टर सिस्टम इंसानी जीवन का हिस्सा रहा होगा, यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.

यह व्यवस्था भारत के गाँवों में हाल तक थी, जब लोग अनाज देकर सब्जियां खरीदते थे. बच्चे अनाज देकर आईसक्रीम या अन्य खाने की वस्तु खरीदते थे. अब से तकरीबन बीस-पच्चीस साल पहले तकभारतीय ग्रामीण समाज में इसका भरपूर प्रचलन था. फसल कटने के समय, धोबी अनाज ले जाते थे और साल भर अपने पेशे से जुड़ी जिम्मेदारी निभाते थे. लेकिन यह सब उदाहरण लेन-देन की समुचितव्यवस्था विकसित होने के बाद के हैं.

पहली बार लीडिया में 600 ईसा पूर्व एक करेंसी इजाद की गई थी. मानव समाज को पहली करेंसी देने का श्रेय  किंग अल्यात्तेस को जाता है

विश्वस्तर पर ऐसा माना जाता है कि पहली बार लीडिया में 600 ईसा पूर्व एक करेंसी इजाद की गई थी. किंग अल्यात्तेस (Alyattes) के नाम मानव समाज को पहली करेंसी देने का श्रेय जाता है. अब वह लीडिया तुर्की का हिस्सा है. पहली बार जो सिक्का बना उसपर दहाड़ता हुआ शेर उकेरा गया था. इसके करीब पच्चीस सौ साल बाद यानी 1946 में पहला क्रेडिट कार्ड आया जो आजकल युवाओं काफैशन है.

बहरहाल, पहले तो बार्टर सिस्टम चलता रहा. लोग लेन-देन में हथियारों का भी इस्तेमाल करते थे. ऐसा कहते हैं कि करेंसी की खोज में एशिया की अहम भूमिका रही है. करीब ग्यारह सौ ईसा पूर्व मेंचीन में पहली बार इन हथियारों की जगह ताम्रपत्र या कहें कि ताम्बे के बने छोटे-छोटे आकार की (miniature) इस्तेमाल किया जाने लगा. ये इतने नुकीले होते थे कि लोग इन्हें अपने पास रखने और लेनेदेने में डरते थे. इससे बचने के लिए कम नुकीले ताम्बे का पत्र तैयार किया जाने लगा, जो गोल होता था. इस तरह मानव समाज में सिक्के का चलन चीन से शुरू हुआ पर सिक्का गढ़ने (Minting) की शुरुआत लीडिया से हुई.

यहाँ से सिक्कों की कहानी शुरू होती है

लगभग 600 ईसा पूर्व लीडिया के राजा अल्यात्तेस (King Alyattes) की वजह से पहला अधिकृत सिक्का जन्म ले चुका था. यह सिक्का एलेक्ट्रुम यानी चांदी और सोने से मिलकर बना होता था जिसपरइसकी कीमत (denominations) बनायी होती थी. इस सिक्के की वजह से लीडिया में व्यापार बहुत आगे बढ़ा और यह देश एशिया (Asia Minor) का सबसे अमीर और ताकतवर साम्राज्य बन करउभरा.

नोट का प्रचलन भी वास्तव में चीन ने ही शुरू किया

जब मार्को पोलो 1200 ईसवी में चीन पहुंचे तो देखा की वहाँ नोट का प्रचलन है. लेकिन यूरोप 1600 ईसवी  तक सिक्के का ही इस्तेमाल करता रहा. इस सिक्के के लिए ये यूरोपी देश अपने गुलाम देशोंसे महंगे द्रव्य ले आते थे. खैर 1600 ईस्वी के आसपास यूरोप के बैंको ने नोट का प्रचलन बढ़ाया. कोई अपने हिस्से का सिक्का ले जाकर उनको नोटों में तब्दील कर सकता था. लेकिन ये नोट बैंक औरनिजी संस्थाओं द्वारा जारी किये जाते थे जिससे बाज़ार में कुछ भी खरीदा जा सकता था. आजकल नोट सरकारें जारी करती हैं.

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