मानवाधिकार आयोग ने बीएचयू के कुलपति से माँगा जवाब

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सौतुक डेस्क/

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रशासन द्वारा किये गए छात्र-छात्राओं के दमन का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और विश्वविद्यालय के कुलपति को नोटिस भेजा है. विश्वविद्यालय में छात्राओं और छात्रों के साथ हुए बर्ताव को आयोग ने मानवाधिकार का हनन करार दिया है.

आयोग ने इन तीनो से पूछा है कि छेड़खानी के आरोपी को सजा देने के लिए क्या कदम उठाये गए हैं और छात्राओं की सुरक्षा की क्या व्यस्था की गयी है. इस जवाब के लिए इन्हें चार हफ्ते का समय दिया गया है.

आयोग ने आज कहा कि मीडिया में लागातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं जिससे पता चलता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्राओं की छेड़खानी सम्बंधित शिकायत पर कोई कदम नहीं उठाया गया. जब छात्रा विरोध प्रदर्शन करने लगी तो उन्ही के साथ मार-पीट की गई. इसमें उत्तर प्रदेश की पुलिस शामिल थी. BHU में जो हुआ है वह सीधा मानवाधिकार का हनन है.

इस घटना की शुरुआत बृहस्पतिवार को हुई जब एक छात्रा को हॉस्टल लौटने के दरम्यान कुछ मोटरसाइकिल सवार ने निशाना बनाया. साढ़े छः बजे शाम के करीब हुई इस घटना में पीछे से कुछ लड़के मोटरसाइकिल पर आये, छेड़खानी की, और भाग गए.  बैचलर ऑफ़ फाइन आर्ट्स (BFA) की पीड़ित छात्रा ने यह भी आरोप लगाया है कि उसने चिल्लाकर कुछ ही दूर पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को आवाज लगाई पर वे लोग इसको बचाने के लिए आगे नहीं आये. हॉस्टल लौटने के बाद पीड़ित लड़की कुछ अन्य साथियों के साथ गार्ड से शिकायत करने पहुंची तो वह उल्टे इस लड़की को ही शिक्षा देने लगा.

अगले दिन सुबह लड़कियां धरने पर बैठ गयी. उसी समय देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी बनारस पहुंचे हुए थे. प्रशासन चुप्पी साधे रहा.

फिर शनिवार की रात में पुलिस ने आन्दोलनरत छात्राओं और छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया.  इसके बारे में छात्रों का कहना है कि पुलिस न केवल लड़कियों के हॉस्टल में घुसी बल्कि उनके कमरे में जाकर उनकी पिटाई की. इन छात्रों का आरोप यह भी है कि जो भी आगजनी हुई है जिसमे कुछ मोटरसाइकिल इत्यादि जलाया गया है, यह प्रशासन के तरफ से किया गया है ताकि छात्रों को इसमें फंसाया जा सके.

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