सावधान! अम्बानी एक्सप्रेस के आने की घोषणा हो चुकी है

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शिखा कौशिक/

अम्बानी वन्दे भारत एक्सप्रेस, अडानी मगध एक्सप्रेस, टाटा सियालदह एक्सप्रेस जैसी गाड़ियों के आने का सिग्नल हो गया है. कृपया अपने सामान बांधकर और दिल थामकर इनका स्वागत करें. आपको ये नाम अजीब लग रहे होंगे लेकिन आने वाले दिनों में कुछ ऐसा ही दिखने वाला है.

भारत सरकार ने गरीब की सवारी माने जाने वाले रेलवे के निजीकरण की तरफ एक कदम और बढ़ा दिया है. पहले कुछ रेलवे स्टेशन को निजी हाथों में सौंपने के बाद अब कुछ चुनिन्दा रेलगाड़ियों को चलाने की जिम्मेदारी भी सरकार अब निजी हाथों में देने जा रही है.

मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, सरकार भारतीय रेल, पर्यटन और कम भीड़ वाले रास्तों पर चल रही गाड़ियों को निजी कंपनियों को देने का विचार कर रही है. इस दायरे में ख़ास रेलगाड़ियों जैसे राजधानी, शताब्दी  वगैरह के साथ इस प्रयोग को शुरू करने पर विचार किया जा रहा है. जल्द ही इसके लिए सरकार टेंडर लाने वाली है.

वर्ष 2018 में जारी अपनी एक रिपोर्ट में नीति आयोग ने इसकी सिफारिश की थी और रेलवे में निजी कंपनियों को लाने की बात की थी. पिछले कुछ सालों में नीति आयोग कई क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और अब रेलवे में निजी भागीदारी की सिफारिश करता रहा है.

इसके पहले सरकार ने रेलवे स्टेशन को निजी कंपनियों को देना शुरू कर दिया था. इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश में आने वाले हबीबगंज रेलवे स्टेशन से की गई थी. कानपुर सेन्ट्रल, इलाहबाद, लोकमान्य तिलक, पुणे, थाणे, विशाखापट्नम, कामख्या, फरीदाबाद, जम्मूतवी, उदयपुर, सिकंदराबाद, विजयवाडा, रांची, चेन्नई सेन्ट्रल, यशवंतपुर, बंगलुरु कांत, भोपाल, मुंबई सेन्ट्रल, बोर्रिवाली और इंदौर जैसे स्टेशन को भी निजी हाथो में दिए जाने की तैयारी है.

यह नागरिकों के लिहाज से सुखद खबर नहीं है. इसका अनुभव लेना है तो हबीबगंज रेलवे स्टेशन की कहानी समझिये. निजी कंपनी को इस स्टेशन का सञ्चालन देने के बाद ही यहाँ पार्किंग में आने वाले गाड़ियों की संख्या कम हो गई. इसकी वजह थी पार्किंग फीस में जरुरत से ज्यादा इजाफा. निजी कंपनी ने बागडोर हाथ में लेते ही गाड़ियों की पार्किंग फीस कई गुना बढ़ा दी. एक मोटरसाइकिल के महीने भर पार्किंग की कीमत 12,000 रुपये कर दी गई, वहीँ स्टेशन के बाहर इसकी कीमत महज 200 रुपये रही. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक खबर के अनुसार पार्किंग फीस बढ़ने के बाद स्टेशन परिसर में पार्क की जाने वाली कुल मोटरसाइकिलों की संख्या में करीब बीस फीसदी की कमी देखी गई.

इस एक उदाहरण से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले समय में भारतीय रेल क्या स्वरुप लेने जा रहा है और इसमें आप कहाँ मौजूद होंगे!

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