रामरहीम पर आये फैसले के बाद के हिंसा के लिए खट्टर जिम्मेदार

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राम रहीम समर्थक ने कई दर्जन गाड़ियाँ अब तक जला दी है. तस्वीर हिन्दू बिज़नस लाइन से साभार

सौतुक डेस्क/

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को, दो महिलाओं के  बलात्कार का दोषी करार दिया. न्यायालय के आदेश के बाद हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिले और देश की राजधानी दिल्ली में राम रहीम के समर्थकों ने भारी उत्पात मचाया. इसमें करीब तीस से अधिक लोगों की जान चली गई और 250 से अधिक गायल हो गए. तोड़फोड़ और आगजनी कि घटनाओं से भी भारी नुकसान हुआ.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना पर दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, “आज हुई हिंसा की घटनाएं अत्यंत विचलित करने वाली हैं। मैं हिंसा की कड़ी निंदा करता हूँ और सभी से शांति बनाए रखने की प्रार्थना करता हूँ.” हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने इसके लिए राम रहीम के समर्थको की भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों को इसका जिम्मेदार बताया है.

लेकिन क्या यह मामला इतना सरल है. क्या खट्टर ने समस्या की गंभीरता को समझा था और जरुरी सावधानी बरती थी. फैसले से एक दिन पहले आये पंजाब और हरियाणा कोर्ट की फटकार से तो ऐसा नहीं प्रतीत होता.

इस घटना के मद्देनज़र हरियाणा सरकार की गंभीरता पर कोर्ट ने पहले ही सवाल खड़े कर दिए थे . पंजाब और हरियाणा कोर्ट ने बृहस्पतिवार को ही हरियाणा सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने राज्य में धारा 144 के सही अनुच्छेद को नहीं लगाया और लोगों को एक जगह इकठ्ठा होने से नहीं रोका गया. यदि धारा 144 के अन्दर सही निर्देश दिए गए होते तो भीड़ को इकठ्ठा होने से रोका जा सकता था, कोर्ट ने कहा था.

इन सारे तथ्यों को अगर एक अन्य खबर से जोड़कर देखा जाए तो समस्या और जटिल दिखती है.

एनडीटीवी वेबसाइट की एक खबर के अनुसार खट्टर सरकार के दो मंत्री 10 दिन पहले 50 लाख रुपये के चेक के साथ राम रहीम से मिलने पहुंचे थे. यह समझ से परे है. यह जानते हुए कि राम रहीम के खिलाफ बलात्कार के मामले में सुनवाई चल रही है और दस दिन में फैसला आने वाला है, हरियाणा सरकार के नुमाईंदे किस उद्देश्य से वह पैसा लेकर वहाँ गए थे.

इसी कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को और चाक-चौबंद करने का आदेश दिया था. साथ में यह भी आदेश दिया कि अगर स्थानीय सुरक्षा बल भीड़ को काबू करने में असफल होता है तो आर्मी की मदद ली जाए. कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि जरुरत पड़ने पर प्रशासन को ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए.

यह सब जानने के बाद आपको नहीं लगता कि हरियाणा सरकार से अधिक तो कोर्ट लोगों की सुरक्षा को लेकर सचेत था.

 

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