क्या गुजरात में मोदी-शाह मुंह की खाने वाले हैं?

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तस्वीर-इन्टरनेट से साभार

सौतुक डेस्क/

गुजरात से खबरें और तस्वीरें तो कुछ ऐसी ही आ रही हैं जिनको देखकर सत्तारूढ़ दल की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके अतिरिक्त सोमवार को एबीपी चैनल के लिए सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़  डेवलपिंग सोसाइटी (CSDS) द्वारा किये गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विपक्ष पर बढ़त लागातार घट रही है.

पिछले कुछ महीनों में स्थिति एकदम उलट गयी है. भारी बढ़त रखने वाली भाजपा को अब कांग्रेस और उसके सहयोगी कांटे की टक्कर दे रहे हैं. CSDS चुनावी लेखा-जोखा करने वाली देश की सबसे विश्वसनीय संस्थाओं में से एक है.

सोमवार को आये इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि भाजपा को कांग्रेस से बढ़त नहीं हासिल है और इन दोनों दलों में अब बराबरी का टक्कर होना है. लेकिन सनद रहे कि चुनाव होने में अभी एक सप्ताह की देरी है. भाजपा  की घटती लोकप्रियता को देखकर अगर कांग्रेस इससे आगे निकल जाए तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होगा.

CSDS एबीपी चैनल के लिए पिछले कई महीनों से सर्वेक्षण कर रहा है. अगस्त महीने में किये गए सर्वेक्षण में भाजपा को कांग्रेस से 30% की बढ़त हासिल थी. अक्टूबर महीने में यह बढ़त घटकर महज  6% रह गयी  और  नवम्बर आते आते यह बढ़त भी ख़त्म हो गयी

CSDS एबीपी चैनल के लिए पिछले कई महीनों से सर्वेक्षण कर रहा है. अगस्त महीने में किये गए सर्वेक्षण में भाजपा को कांग्रेस से 30% की बढ़त हासिल थी. अक्टूबर महीने में यह बढ़त घटकर महज 6% रह गयी और नवम्बर आते-आते यह बढ़त भी ख़त्म हो गयी.

देश के कुछेक चुनावी गणित के विशेषज्ञों में से एक, योगेन्द्र यादव लिखते हैं कि सामान्यतः चुनाव के पहले के सर्वेक्षण सत्तारूढ़ दल की तरफ झुका हुआ होता है. अगर इसको भी मान लिया जाए तो गुजरात में इस बार भाजपा की बुरी हार होने वाली है. उनके अनुसार यह राजनितिक भूकंप जैसा कुछ होगा.

यह लागातार देखने में आ रहा है कि भाजपा अपनी रैली में भीड़ इकट्ठा नहीं कर पा रही है. यहाँ तक कि भाजपा के स्टार प्रचारक और देश के प्रधानमंत्री जो किसी भी चुनाव को सामान्य से अधिक गंभीरता से लेते हैं, उनकी रैलियों में भी कुर्सियां खाली रह जा रही हैं. दूसरी तरफ हार्दिक पटेल और अन्य नेता जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हैं अपने रैली में अच्छी खासी भीड़ इकठ्ठा कर ले रहे हैं.

ऐसा दिल्ली के विधानसभा चुनाव में ही देखा गया था जब नरेन्द्र मोदी की रैली में लोग नहीं आ रहे थे और प्रधानमंत्री को कुछ रैलियाँ रद्द करनी पडी थीं. बाद में चुनाव के नतीजे एकतरफा थे जिसमें आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीट जीत ली थी.

उस चुनाव के बाद से मोदी रैलियों में भीड़ को आकर्षित करने में सफल रहे हैं और चुनावी नतीजे भी लगभग उनके पक्ष में ही गए हैं.

गुजरात चुनाव की रैलियों की तस्वीरें सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शेयर की जा रही हैं. दोनों दल कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे की रैली में कम भीड़ दिखाकर यह साबित करना चाह रहे हैं कि उनके विपक्ष का पलड़ा कमजोर है. अलबत्ता कुछेक मीडिया संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर यही दिखा रहे हैं कि पलड़ा मोदी का ही भारी है, जो कि सोशल मीडिया पर चल रही तस्वीर और विडियो से एकदम अलग है.

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