गुजरात चुनाव में हुए कुछ अजब गजब उठा-पटक, कई अप्रत्याशित परिणाम

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मोदी के घर में हारी भाजपा तो नोटा तीसरा सबसा बड़ा दल बनकर उभरा

सौतुक डेस्क/

यह जानकार ताज्जुब होगा कि गुजरात के लोगों ने भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर ‘नन ऑफ़ द अबव’ जिसको नोटा भी कहते हैं उस बटन को दबाया. चुनाव आयोग ने जनता को यह सुविधा इस स्थिति में दी है कि अगर लोगों को कोई भी उम्मीदवार पसंद न आये तो वे इस बटन को भी दबा सकते हैं.

सोमवार को घोषित परिणाम में नोटा के नाम पर दो राष्ट्रीय राजनितिक दल से अधिक वोट मिले. भाजपा और कांग्रेस के बाद केवल निर्दलीय उम्मीदवारों को कुल मिलाकर नोटा से अधिक समर्थन मिला.

करीब 5.52 लाख लोगों ने नरेन्द्र मोदी के गढ़ गुजरात में किसी भी दल को अपने अपेक्षा अनुसार न पाकर नोटा का बटन दबाया.

करीब 5.52 लाख लोगों ने नरेन्द्र मोदी के गढ़ गुजरात में किसी भी दल को अपने अपेक्षा अनुसार न पाकर नोटा का बटन दबाया. यह कुल वोट का 1.8 प्रतिशत होता है जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को महज 2.07 लाख वोट पड़े और शरद पवार के नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को इससे भी कम 1.85 लाख वोट पड़े.

कई जगह तो दोनों दल के जीत के अंतर से अधिक नोटा को वोट मिले. इनमे से एक है पोरबंदर जहां भाजपा के बाबुभाई बोखारिया को 1,855 वोट से अपने प्रतिद्वंदी पर जीत मिली जबकि उस विधान सभा क्षेत्र में कुल 3,433 बार नोटा का बटन दबाया गया. इसी तरह वर्तमान के मुख्यमंत्री विजय रुपानी के राजकोट विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,309 लोगों ने नोटा का बटन दबाया. वाडगाम में कुल 4,255 लोगों ने नोटा का बटन दबाया. इसी सीट से निर्दलीय जिग्नेश मेवानी ने जीत दर्ज की.

हिमाचल प्रदेश में स्थिति इससे काफी बेहतर थी और वहाँ एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने नोटा का बटन दबाया.

गुजरात चुनाव एक नज़र में

आखिरकार 22 साल से सत्ता में रही भाजपा को 99 सीट से संतोष करना पड़ा. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 150 सीट जीतने का दवा किया था. वहीँ कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं की मदद से 80 सीट पर जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की. अन्य को तीन सीटें मिली.

सबसे गौर करने वाली बात रही कि नरेन्द्र मोदी अव्वल तो अपने गृह क्षेत्र में भी भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में असफल रहे वहीँ तीन शहरों के विधान सभा क्षेत्र ने उनके दल को बचा लिया वरना उनकी पार्टी को इस विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में बैठना पड़ता. अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत और राजकोट के कुल 53 सीट में से भाजपा को 44 सीट पर जीत मिली वहीँ राज्य के अन्य क्षेत्र में कांग्रेस ने कुल 127 में से 70 सीट पर जीत दर्ज की.

खासकर सूरत के चुनाव परिणाम एकदम चौंकाने वाले थे. सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के कदम के बाद इस शहर में लागातार प्रदर्शन हो रहे थे और इन प्रदर्शनों में भीड़ देखकर ऐसा लगा रहा था कि इस बार लोग भाजपा से मुंह मोड़ लेंगे. लेकिन चुनाव परिणाम पक्ष, विपक्ष और चुनावी विश्लेषको के लिए एकदम अप्रत्याशित थे. सूरत जिले के कुल सोलह सीट में से भाजपा ने पंद्रह पर जीत दर्ज की वहीँ एक सीट जो आदिवासियों के लिए सुरक्षित था उसपर कांग्रेस को बढ़त मिली. सूरत शहर के सारे नौ के नौ सीट भाजपा के खाते में गया.

एक और बड़ा चौंकाने वाला परिणाम था कि भाजपा नरेन्द्र मोदी के अपने शहर में ही हार गयी

एक और बड़ा चौंकाने वाला परिणाम था कि भाजपा नरेन्द्र मोदी के अपने शहर में ही हार गयी जहां कांग्रेस की आशा पटेल ने भाजपा के नारायणभाई लल्लूदास को बड़े अंतर से मात दी. यह उंझा की बात है जो नरेन्द्र मोदी का घरेलु शहर है.

गुजरात सरकार के पांच मंत्रियों को हार का स्वाद चखना पड़ा

वैसे तो भाजपा ने 99 सीट पर जीत हासिल कर सरकार बनाने का रास्ता तैयार कर लिया है पर उसके पांच मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा है. इनमें आत्माराम परमार और चिमनभाई सपारिया मंत्री रहे हैं तो शंकर चौधरी, केशाजी चौहान और शब्दशरण तदवी जो राज्य सरकार में राज्य मंत्री रहे हैं, उन्हें भी अपनी सीट गंवानी पड़ी है.

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