गुजरात का विकास मॉडल: मोदी के कार्यकाल में राज्य के बच्चे हुए अधिक कुपोषित

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गुजरात में वर्ष  2005 में 18.7 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिनका वजन उनकी लम्बाई के हिसाब से कम था, 2015 में यह बढ़कर 26.4 प्रतिशत हो गया

उमंग कुमार/

नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में गुजरात में कुछ ऐसी भी चीजें बढ़ी है जिसको वे खुद गुजरात मॉडल के तौर पर देखना-दिखाना नहीं चाहेंगे. जो लोग चाहते हैं कि गुजरात जैसा विकास उनके राज्य में भी हो, वे भी एक बार सोचेंगे. इनमें से एक है वैसे बच्चों की संख्या जिनका वजन उनकी लम्बाई के हिसाब से कम है. मोदी के कार्यकाल में गुजरात में ऐसे बच्चों की संख्या काफी बढ़ी है जिनका वजन उनके लम्बाई की तुलना में काफी कम है.

गुजरात में वर्ष  2005 में 18.7 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिनका वजन उनकी लम्बाई के हिसाब से कम था. वहीँ 2015 में ऐसे बच्चों का प्रतिशत बढ़कर 26.4 प्रतिशत हो गया. यानि करीब आठ प्रतिशत बच्चे इस तरह के कुपोषण में और जुड़ गए हैं.  ये बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं और यह आंकड़ा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थय सर्वेक्षण (NFHS) से लिया गया है.

लम्बाई के हिसाब से वजन कम होना एक तरह का कुपोषण है जिसे अंग्रेजी में वेस्टिंग (Wasting) कहते हैं.

इसी तरह गुजरात में इस श्रेणी के अति कुपोषित बच्चों की संख्या भी बढ़ी है. वर्ष 2005 में जहां ऐसे बच्चों का प्रतिशत महज 5.8 था, अब दस साल बाद करीब 9.5 प्रतिशत बच्चे इस अति कुपोषण वाले श्रेणी में आ गए. इन बच्चों का वजन इनकी लम्बाई के हिसाब से अत्यधिक कम था और दस साल में ऐसे बच्चो की संख्या में दोगुने से थोड़े ही कम की वृद्धि हुई है.

सनद रहे कि हाल ही में आये ग्लोबल हंगर इंडेक्स जिसका हिंदी में अनुवाद वैश्विक भूखमरी सूचकांक के तौर पर किया जा रहा है उसमे भारत की स्थिति खराब होती नज़र आ रही थी. इस बदतर होती स्थिति के पीछे वेस्टिंग  वाले कुपोषण की अहम् भूमिका है.

वर्ष 2005 में जहां अति कुपोषित बच्चों का प्रतिशत महज 5.8 था, अब दस साल बाद करीब 9.5 प्रतिशत  हो गया है . इन बच्चों का वजन इनकी लम्बाई के हिसाब से अत्यधिक कम था और 10 सालों में ऐसे बच्चों की संख्या में दोगुने से थोड़े ही कम की वृद्धि हुई है

इसी तरह गुजरात के कुछ और भी आंकड़े हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में स्थिति इस कदर बदतर तो नहीं हुई है पर उनमें अपेक्षित सुधार भी नहीं हुआ है. जैसे महिलाओं में खून की कमी, जिसे एनीमिया कहते हैं.

वर्ष 2005 में गुजरात में 15 से 49 साल की महिलाओं में कुल 55.2 प्रतिशत ऐसी थीं जिनके शरीर में खून की कमी थी. इन महिलाओं का प्रतिशत 2015 में 55.1 प्रतिशत रहा. मतलब दशमलव एक प्रतिशत का मामूली सुधार. यह भी एक तरह का कुपोषण है और अगर पाठकों को याद हो तो नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए एक बार कहा था के उनके राज्य में महिलायें कुपोषित इसलिए हैं क्योंकि वे डाइटिंग करती हैं.

स्वास्थ्य के इन आंकड़ों के अतिरिक्त, स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी में भी कमी देखी गयी है. वर्ष 2005 में जहां गुजरात में 34.8 प्रतिशत ऐसे पुरुष थे जिनको एड्स (HIV/AIDS) की समुचित जानकारी थी. दस साल बाद इस विषय से स्पष्ट तौर पर अवगत पुरुषों का प्रतिशत घट कर 31.4 हो गया. दस साल बाद जहां जानकारी बढ़नी चाहिए थी वहाँ घटी है. 2005 में 72.4 प्रतिशत ऐसे पुरुष थे जिनको यह मालूम था के कंडोम के लागातार इस्तेमाल से HIV/AIDS नहीं होगा. दस साल बाद महज 68.6 प्रतिशत लोग ही थे जिनको यह मामूली जानकारी थी.

पाठकों को यह भी याद रहे की एड्स से निपटने के लिए सरकार का सबसे अधिक फोकस जागरूकता पर ही होता है.

ये आंकड़े बता रहे हैं कि कहीं न कहीं सरकार का ध्यान स्वास्थ्य सुविधाओं पर नहीं रहा है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जरुरी जागरूकता घटी है.

कुछ ख़ास इंडिकेटर/ वर्ष 2005 2015
5 साल से कम उम्र के वेस्टेड बच्चे (%) 18.7 26.4
5 साल से कम उम्र के (अति)वेस्टेड बच्चे (%) 5.8 9.5
15-49 साल की महिलाएं जो अनेमिक थीं. इनमें गर्भवती महिलाएं शामिल नहीं है (%) 55.2 55.1
पुरुष जिन्हें एड्स  की समुचित जानकारी थी (%) 34.8 31.4
पुरुष जिन्हें मालूम था की कंडोम के लागातार इस्तेमाल से एड्स जैसी बिमारी से बचा जा सकता है (%) 72.4 68.6

स्रोत- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थय सर्वेक्षण

नरेंद्र मोदी साढ़े बारह साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. इस कार्यकाल में गुजरात में हुए विकास को उन्होंने गुजरात मॉडल नाम दिया. अब फिर गुजरात विधानसभा चुनाव सर पर है. जहां गुजरात के लोगों को ही तय करना है, उनके हिसाब से यह मॉडल उनको फायदा  पहुंचा  पाया है नहीं.

गुजरात का चुनाव कई मायनों में देश के लिए अहम् है. इसी गुजरात के विकास मॉडल के नाम पर नरेन्द्र मोदी देश के सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे हैं और लोगों के मन में उम्मीद जगाई  है कि देश के बांकि हिस्से का भी विकास ऐसे ही किया जाएगा. इसी ब्रांड गुजरात पर देश के प्रधानमंत्री विकास पुरुष हैं.

देखना यह है की धर्म और तीन तिकड़म के राजनीति में जनता से जुड़े ये मुद्दे किसी को याद रहते हैं भी या नहीं. गुजरात चुनाव के नतीजे आने में अभी करीब महीना बाकि है जो तय करेगा कि देश के भविष्य की राजनीति क्या होगी.

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