सरकार आपको देगी ऐसा पासोपोर्ट जो विदेश में भी बताएगा कि आप अमीर हैं या गरीब 

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सौतुक डेस्क/

अब तक देश से बाहर जाने वाला हर व्यक्ति बाहर जाकर भारतीय हो जाता था. अन्य देशों के सरकारी अधिकारी, वहाँ के नागरिक और खुद भारतीय भी एक दूसरे को ऐसे ही पहचानते थे. आने वाले समय में ऐसा नहीं होगा. अब वहाँ लोग भारतीय नागरिकों को अमीर या गरीब भारतीय के तौर पर भी पहचानेंगे. विदेश मंत्रालय के नए नियम लागू होने के बाद जब आप विदेश की धरती पर उतरेंगे तो सबसे पहले यह पता चलेगा कि आप भारत से आये हैं और दूसरे कि आप अमीर भारतीय हैं कि गरीब भारतीय.

शनिवार को विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि अब सामान्य तौर पर जो नीला पासपोर्ट सबको दिया जाता था वह नहीं होगा. अब भारत सरकार उनलोगों के लिए जो कम पढ़े लिखे हैं और पश्चिमी एशिया में काम करने जा रहे हैं उनके लिए एक ख़ास नारंगी रंग के कवर वाला पासपोर्ट तैयार किया जाएगा.

देखने में पासपोर्ट का रंग भर बदलना एक मामूली सी बात लग सकती है. पर इसका असर बहुत व्यापक होने वाला है. ये भारतीय लोगों को जो विदेश जा रहे हैं, उनको उनके आर्थिक स्थिति से बांटेगा. ये सामान्यतः वे लोग होंगे जो विदेशों में मजदूरी करने जाते हैं जिसको अंग्रेजी में ब्लू-कालर जॉब कहते हैं.

देखने में पासपोर्ट का रंग भर बदलना एक मामूली सी बात लग सकती है. पर इसका असर बहुत व्यापक होने वाला है. ये भारतीय लोगों को जो विदेश जा रहे हैं, उनको उनके आर्थिक स्थिति से बांटेगा.

सरकार के घोषणा के अनुसार तो यह निर्णय इन गरीबों को विदेश आने जाने से जुड़ी समस्या जैसे ट्रैफिकिंग इत्यादि से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लिया गया है. लेकिन इससे इमीग्रेशन (अप्रवासन) से जुड़े सरकारी पेंच जिसमें अधिकतर गरीब ही फंसते हैं, और बढ़ेंगे बढेगा. यह इन मजदूर वर्ग के लोगों को लालफीता शाही का शिकार बनाएगा.

भारत से विदेश जाने की गतिविधि पहले ही कई मंत्रालयों के चक्र से होकर गुजरती है. जैसे पासपोर्ट इत्यादि विदेश मंत्रालय के अधीन आता है. फिर इमीग्रेशन की बात आती है जिसके लिए अलग विभाग है. इसके बाद गृह मंत्रालय की जांच इत्यादि शुरू होती है.

सवा सौ करोड़ से अधिक भारतीयों के पासपोर्ट से जुडी समस्या से निपटने के लिए बमुश्किल नौ केंद्र हैं जिससे बिचौलियों की भूमिका बढ़ जाती है. दूसरे पश्चिमी एशिया में जितनी संख्या में भारतीय मजदूर मौजूद हैं उनके मुकाबले भारतीय सरकारी अधिकारीयों की संख्या लगभग नगण्य है. सऊदी अरब और अरब अमीरात में जहां 20 लाख से अधिक भारतीय मजदूर काम करते हैं वहाँ महज दो अधिकारी मौजूद हैं इन लोगों से जुडी समस्या से निपटने के लिए.

इस मामले में विशेषज्ञों की मानें तो यह नया पासपोर्ट एक तरह से स्टाम्प का काम करेगा यह बताने के लिए कि यह पासपोर्ट धारक कमजोर तबके से आता है. कमजोर तबके से आने के बाद हर कदम पर शोषण कोई नई बात नहीं है.

 

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