प्याज़ की जमाखोरी के खिलाफ राज्य होंगे और सख्त

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सौतुक डेस्क/

प्याज़ के बढ़ते दाम के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्यों को स्टॉक सीमा तय करने और जमाखोरी जैसी बुराई को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने के लिए सक्षम बनाया है. अब राज्य सरकार यह तय कर सकेंगे कि कितनी सीमा में प्याज़ वगैरह जमा किये जा सकते हैं. उसके बाद जमाखोरों पर एक्शन लिया जा सकेगा.

सरकार ने अपने नए आदेश के सन्दर्भ में अधिसूचना जारी किया है. सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार आवश्‍यक वस्‍तुओं की कीमतों को नियंत्रित करना सुनिश्चित करने के क्रम में, अगस्त 25 को अधिसूचना जारी की. इसके तहत राज्य इस सम्बन्ध में निर्णय ले सकेंगे कि एक व्यक्ति कितना प्याज़ जमा कर सकता है. अब राज्‍य प्याज़ के संबंध में स्‍टॉक सीमा अधिरोपित कर सकेंगे और जमाखोरी-रोधी ऑपरेशन, सट्टेबाजों और मुनाफाखोरों के विरूद्ध कार्रवाई करने जैसे विभिन्‍न कदम उठा सकेंगे.

हाल ही के सप्‍ताहों में विशेषत: इस वर्ष जुलाई माह के अंत से आगे प्‍याज की कीमतों में हुई असामान्‍य वृद्धि के चलते सरकार को यह कदम उठाना पड़ा. हालांकि प्‍याज का उत्‍पादन और बाजार में इसकी आपूर्ति पिछले वर्ष के दौरान इसी अवधि की तुलना में बेहतर है. अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्‍य के अनुसार कीमतें 15 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 28.94 रुपये प्रति किलो हो गयी हैं.  वहीं महानगरों में यह बढ़ोतरी और भी अधिक है जैसे चेन्‍नई में 31 रूपया प्रति किलो और दिल्ली में 38 रूपया प्रति किलो, कोलकाता में 40 रूपया प्रति किलो और मुम्‍बई में 33 रूपया प्रति किलो हो गया है.

सभी परिस्थितियों की जांच करने के बाद सरकार का यह तर्क है कि प्याज़ के मूल्‍यों में इस वृद्धि के कारणों में प्याज़ की कमी के अलावा कुछ अन्‍य कारण भी हैं जैसे कि जमाखोरी और सट्टेबाजी इत्‍यादि. अत:, राज्‍यों/संघ शासित क्षेत्रों को ऐसे व्‍यापारियों, जो प्याज़ की सट्टेबाजी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी से जुड़े हैं, के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए समर्थ बनाना आवश्‍यक था. इन उपायों से प्याज़ की कीमतों में उचित स्‍तर तक कमी आने का अनुमान है जिससे उपभोक्‍ताओं को तत्‍काल राहत मिलेगी.

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