सरकार ने सार्वजनिक बैंको के विलय को मंजूरी दी

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सौतुक डेस्क/

सरकारी बैंक के कर्मचारियों के हड़ताल के ठीक एक दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के विलय को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी प्रदान कर दी. अगस्त 23 को आये इस फैसले से भारत के बैंकिंग सेक्टर में बड़ा परिवर्तन आने की सम्भावना है. बैंक कर्मचारी ने अगस्त 22 को ऐसे किसी भी फैसले का विरोध करने के लिए एक दिन का हड़ताल किया था.

सरकार ने दावा किया कि इस निर्णय से राष्ट्रीयकृत बैंकों के विलय के फलस्वररूप सशक्त और प्रतिस्पर्धी बैंकों के निर्माण में मदद मिलेगी.
इस समय भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर 20 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मौजूद हैं. भारतीय स्टेट बैंक का अन्य कई बैंको का विलय पिछले साल ही हुआ है.

सनद रहे कि 1970-80 के बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था. सरकार का कहना है कि तबसे समय में काफी परिवर्तन हो चूका है और निजी क्षेत्र के बैंकों की बढ़ती मौजूदगी, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, भुगतान बैंकों और छोटे वित्तीतय बैंकों के संख्या काफी बढ़ी है.

सरकार के अनुसार, इस निर्णय से विकासशील अर्थव्यवस्था की ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. सरकार ने यह भी दावा किया कि इस फैसले से बैंकिंग क्षेत्र के उतार-चढ़ाव को झेलने और राजकोष पर अनावश्यक निर्भरता के बगैर संसाधन जुटाने की दृष्टि से सार्वजनिक क्षेत्र में मजबूत और प्रतिस्पेर्धी बैंकों के निर्माण में मदद मिलने की संभावना है.

सनद रहे कि मई 2016 में ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की प्रभावी कार्रवाई प्रारंभ हुई और छह बैंकों के भारतीय स्टेट बैंक में विलय की घोषणा की गई. भारतीय स्टेट बैंक अब करीब 24000 शाखाओं, 59000 एटीएम, 6 लाख पीओएस मशीनों तथा 50000 से ज्यादा बिजनेस वाला अकेला बैंक है जो दूर-सुदूर क्षेत्रों सहित देश के सभी भागों में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है. वस्तुत: भारतीय स्टेट बैंक के नेटवर्क में 70 प्रतिशत शाखाएं और ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं. यह दावा सरकार ने किया.

सरकार ने बताया है कि 1991 में यह सुझाव दिया गया था कि भारत में कुछेक किंतु मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक होने चाहिए.

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