सर्च इंजन के गलत इस्तेमाल के लिए यूरोप में लगा गूगल पर भारी जुर्माना

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करीब सात साल के जांच के बाद यूरोपियन यूनियन ने सर्च इंजन के बादशाह गूगल पर 242 करोड़ (2.42 बिलियन) यूरो का जुर्माना लगाया है. गूगल पर यह जुर्माना उसके ऑनलाइन खरीदारी सेवा को स्थापित करने के उद्देश्य से अपने सर्च इंजन का गलत इस्तेमाल करने के लिया लगाया गया है.

कमीशन के अनुसार गूगल ने जान बुझकर और गैर कानूनी ढंग से खुद की सेवा जिसमे विभिन्न वस्तुओं के दाम की तुलना की जाती है को तरजीह दी.  इस तरीके से गूगल ने अपने ग्राहकों को सही चुनाव करने से और साथ ही अपने प्रतिद्वंदियों को स्वस्थ मुकाबले से वंचित किया.

इस नए आदेश के अनुसार गूगल के पास 90 दिन का समय है. इसी 90 दिन में इसको अपनी यह गैरकानूनी गतिविधि बंद करनी है और साथ ही यह भी बताना है कि यह अपने सिस्टम में सुधार कैसे लाएगा.  ऐसा नहीं कर पाने के स्थिति में इस सर्च इंजन कंपनी पर रोज के हिसाब से 1.०६ करोड़ (10.6 मिलियन) यूरो का जुर्माना और लगेगा. याद रहे कि गूगल के असली कंपनी का नाम है अल्फाबेट और गार्डियन अखबार के अनुसार यह रकम अल्फाबेट के दुनियाभर के रोज के औसत आय का करीब पांच प्रतिशत बैठता है.

गूगल यूरोप में एक महत्वपूर्ण और प्रभाव रखने वाला सर्च इंजन है. इसको ध्यान में रखते हुए यूरोपियन यूनियन इसकी जांच भी कर रहा है कि और किस तरह से गूगल अपनी सुविधा का गलत इस्तेमाल कर सकता है. खासकर स्थानीय स्तर पर नक़्शे, तस्वीर और सूचना से जुड़े मामलों में.

इस फैसले का महत्व इसलिए भी है कि एक बार संस्थागत आरोप साबित होने के बाद अन्य लोग या संस्थाएं भी इस कंपनी पर केस कर सकती हैं अगर उन्हें  ऐसा लगता है कि किसी भी तरीके से गूगल की वजह से कोई घाटा हुआ है.

आज कल यह कंपनी भारत में भी कई तरह के सुविधाए देने का दावा कर रही है जिसमे क्रिकेट स्कोर से लेकर, स्थानीय दुकानों के पते और ट्रैफिक का हाल तक मुहैया करने की सुविधा शामिल है.

 

यूरोपियन यूनियन के कुछ ऐसे ही ऐतिहासिक फैसलें

वर्ष 2004 में माइक्रोसॉफ्ट को भारतीय रुपये में 8 ख़राब से भी ज्यादा (120 करोड़ यूरो) का जुर्माना- कम्प्यूटर की दुनिया के इस दिग्गज कंपनी पर आरोप था कि इसने अपने प्रतिद्वंदी को वह कोड नहीं दिया जिससे वह इसके सर्वर पर आकर बाजार में बराबर की लड़ाई लड़ सकें. जब कंपनी ने कमीशन के फैसले को नजरअंदाज किया तो इसपर वर्ष 2006 और 2008 में दो और जुर्माना ठोंका गया. पहले यह जुर्माना 497 मिलियन यूरो का था जिसे बढाकर 1.2 बिलियन कर दिया गया.

इसी तरह इंटेल को वर्ष 2009 में 8 ख़राब रुपये से भी ज्यादा (110 करोड़ यूरो) का जुर्माना लगा. अमेरिका की इस कंपनी पर स्वस्थ प्रतिद्वान्दिता के खिलाफ जाने का आरोप लगा. जिसमे कमीशन ने पाया कि इस कम्पनी ने एसर, डेल, एचपी और अन्य कम्पनियों को दाम में छूट देती थी इस शर्त पर कि ये इंटेल का ही चिप खरीदें.

हाल ही में, फेसबुक पर करीब 80 अरब रुपये (11 करोड़ यूरो) का जुर्माना लगाया गया. सोशल नेटवर्किंग में अपना सिक्का जमाने वाली इस कंपनी पर कमीशन को वर्ष 2014 में जांच के दौरान गलत सूचना देने का आरोप था. कमीशन फेसबुक द्वारा वाट्सएप की खरीद का जांच कर रही थी.

सनद रहे कि यहाँ यूरो की तुलना रुपये से 28 जून को की गई है जब एक यूरो का मूल्य 73.47 रुपये था.

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