अडानी के गोड्डा पॉवर प्लांट के लिए झारखण्ड में जबरन भूमि अधिग्रहण

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प्रतीकात्मक तस्वीर: साभार लाइवमिंट

अनिमेष नाथ/

हाल ही में झारखण्ड के गोड्डा जिले में एक फैक्ट फाइंडिंग टीम गई और पाया कि अडानी समूह के पॉवर प्लांट के लिए बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण किया गया है. इसके टीम के अनुसार लोगों को धमकी दी गई और पुलिस ने बर्बरता भी की.

सनद रहे कि वर्ष 2016 में झारखण्ड सरकार ने अडानी समूह के साथ संथाल परगना क्षेत्र में आने वाले गोड्डा जिले में एक संयत्र स्थापित करने के लिए सहमति दी. ऐसा माना जाता है कि यह कंपनी गोड्डा जिले से होने वाले बिजली उत्पादन से बांग्लादेश में आपूर्ति करेगी.

कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोड्डा जिले के दो ब्लाकों में आने वाले 10 गाँवों में फैली लगभग 551 हेक्टेयेर भूमि का इस परियोजना के लिए अधिग्रहण किया जाना है. कंपनी का दावा है कि यहाँ बिजली उत्पादन सयंत्र से स्थानीय लोगों के लिए  रोज़गार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे.

लेकिन कंपनी के ‘रोजगार’ जैसे शब्द स्थानीय लोगों को लुभाने में सफल नहीं हुए और लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. इस विरोध को देखते हुए पिछले 16-17 अक्टूबर को झारखण्ड जनाधिकार महासभा (जेजेएम) और तीन अन्य संगठनों ने इस जिले का दौरा किया था.

टीम का दावा है कि अधिकांश लोग आजीविका के लिए भूमि पर ही निर्भर हैं, फिर भी उनके इस एकमात्र साधन को हथियाने के लिए उनपर लगातार अत्याचार किया जा रहा है

वहाँ पहुँचने पर टीम ने पाया कि जमीनी हकीक़त बिलकुल अलग है. माली-मोतिया, गंगा-गोबिंदपुर और पटवा गाँवों के स्थानीय लोग अपनी उपजाऊ कृषि भूमि के साथ समझौता करने को तैयार नहीं है. कंपनी ने इन गाँवों की लगभग 220 हेक्टेयेर ज़मीन पहले से ही अधिगृहीत कर ली है.

गोड्डा निवासी एवं जेजेएम के सदस्य चिंतामणि साहू, जिन्होनें रांची में 31अक्टूबर को हुई प्रेस कांफ्रेंस में भाग लिया था, कहते हैं कि “ग्राम सभा की सहमति के बिना ही भूमि का अधिग्रहण किया गया है.”

इस टीम का दावा है कि अधिकांश लोग आजीविका के लिए भूमि पर ही निर्भर हैं, फिर भी उनके इस एकमात्र साधन को हथियाने के लिए उनपर लगातार अत्याचार किया जा रहा है.

संथाल परगना टेनेंसी एक्ट(SPT) की धारा 20 के अनुसार, संथाल परगना के अंतर्गत आने वाले दुमका, देवघर, जमातारा, पाकुर और साहेबगंज जिलों की कृषि भूमि (कुछ अपवादों को छोड़कर) को किसी भी सरकारी अथवा निजी परियोजनाओं के लिए स्थानांतरित या अधिग्रहित नहीं किया जा सकता.

झारखण्ड में भूमि अधिग्रहण को लेकर चल रहे आन्दोलन नए नहीं हैं. जून-जुलाई 2017 में भी सरकार द्वारा सदियों से चले आ रहे छोटा नागपुर एक्ट (CPT) और SPT में संसोधन करने हेतु उठाये गए कदम पर सरकार को राज्यस्तरीय विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था.

रांची स्थित सामाजिक कार्यकर्त्ता स्टेन स्वामी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में खानों, बांधों, उद्योगों, वन्यजीव अभ्यारण्य और क्षेत्रीय फायरिंग श्रेणियों के कारण लगभग दो करोड़ लोग लोग यहाँ से विस्थापित हुए हैं.

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