पारंपरिक पोशाक देखकर पूर्वोत्तर की महिला को दिल्ली गोल्फ क्लब ने निकाला; अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगा जवाब

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सौतुक डेस्क/

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने आज शुक्रवार को पूर्वोत्तर की महिला से साथ भेदभाव की शिकायत पर गोल्फ क्लब को नोटिस जारी किया है.

गोल्फ क्लब में अपने पोशाक के लिए बाहर किये जाने वाली महिला मेघालय में अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती है. इसलिए एनसीएसटी ने क्लब से सात दिनों के भीतर इस नोटिस का उत्तर देने, मामले से जुड़े तथ्यों और जानकारी देने के लिए कहा है. साथ ही यह भी कहा है कि गोल्फ क्लब बताए कि इस मामले में उसने क्या कार्रवाई की.

मेघालय की एक रहने वाली तैयलिन लिंगदोह को दिल्ली के गोल्फ क्लब जिसे आज के समय में एक कुलीन क्लब के तौर पर समझा जा सकता है. वहाँ से लिंगदोह को निकल जाने को कहा गया. उनका दोष महज इतना था कि उन्होंने अपने पारंपरिक खासी परिधान पहन रखा था. क्लब के कर्मचारियों का मनाना था कि वह परिधान ‘घरेलू सहायिका ‘ के परिधान जैसा दिखता है.
तैयलिन लिंगदोह के इस परिधान को जैनसेम के नाम से जाना जाता है जो परंपरागत तौर पर खासी समुदाय की महिलाएं पहनती हैं.
लिंगदोह अपनी नियोक्ता निवेदिता बर्थाकुर सोंधी के साथ वहाँ गयीं थी. उनके नियोक्ता को 25 जून को दिल्ली गोल्फ क्लब में यहां के एक सदस्य ने आमंत्रित किया था. उनके साथ उनके बच्चे की देखभाल करने वाली लिंगदोह भी वहां गई थीं.
इसके बाद इस घटना की चारो तरफ निंदा हुई थी. आज आयोग ने मेघालय राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष और असम सिविल सोसायटी के ज्ञापन पर नोटिस जारी किया. आयोग ने यह भी निर्णय किया है कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338ए द्वारा उसे प्रदान की गई शक्तियों के अनुसरण में मामले की जांच/पूछताछ करेगा.

नोटिस में कहा गया है कि अगर आयोग को निर्धारित समयसीमा में क्लब का जवाब नहीं मिलता है तो वह संविधान के अनुच्छेद 338ए की धारा के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है और क्लब के अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर आयोग के समक्ष पेश होने का समन जारी कर सकता है.
इसी बीच एनसीएसटी ने यूट्यूब सोशल मीडिया मंच पर अंडमान द्वीप समूह की जारवा और अन्य संरक्षित जनजातियों की आपत्तिजनक वीडियो फिल्मों और तस्वीरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इन पर कार्रवाई शुरू कर दी है.

आयोग ने यूट्यूब से इन आपत्तिजनक वीडियो फिल्मों को हटाने तथा इन वीडियों क्लिप्स को सोशल मीडिया मंच पर अपलोड करने वालों पर कार्रवाई शुरू करने के लिए इस मामले को गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के समक्ष उठाने का फैसला किया है.

18.6.1956 के अंडमान एवं निकोबार द्वीप (आदिम जनजाति संरक्षण) कानून, 1956 (पीएटी) के अनुसार अंडमानिज, ओंग्स, सेंतिनेलिज, निकोबारिज और शोम पैंस की पहचान ‘आदिम जनजातियों’ के रूप में पहचान की गई है. पीएटी के अंतर्गत इन समुदायों को बाहरी हस्तक्षेप से संरक्षित किये जाने का प्रावधान हैं. वर्ष 2012 में आदिम जनजातियों से संबंधित विज्ञापनों के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दंड के प्रावधान किये गए थे. जो भी धारा 7 के अंतर्गत अधिसूचना (जो आरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश को निषिद्ध करती है) का उल्लंघन कर इन क्षेत्रों में फोटो खींचने या वीडियो बनाने के लिए दाखिल होता है, उसे तीन साल तक का कारावास हो सकता है. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम) की धारा 3 (i) (आर) भी ग्रहण की गई है.

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की कुल आबादी लगभग 28077 है. इनमें से पांच जनजातीय समुदायों की तादाद 500 से भी कम है.

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