दूरदर्शन परंपरा: चुनाव के दौरान सभी पक्ष को अपनी बात कहने का मौका

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उमंग कुमार/

चुनाव आयोग ने सोमवार को सरकारी चैनल दूरदर्शन को एक नोटिस जारी किया और एकतरफा कवरेज देने के लिए इसकी भर्त्सना की. आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से यह चैनल, सत्ता में बैठे राजनितिक दल को विपक्षी दलों के मुकाबले काफी अधिक कवरेज दे रहा था. एक सप्ताह पहले ही निर्वाचन आयोग ने इस चैनल को आदेश दिया था कि किसी एक राजनितिक दल को खास तरजीह देने से बचे.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को डीडी न्यूज़ और इससे जुड़े अन्य चैनल पर कुल 160 घंटे का एयरटाइम कवरेज दिया गया वहीँ कांग्रेस को इसका आधा कवरेज दिया गया.

क्या आपको मालूम है कि दूरदर्शन पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ के राजनितिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान बराबर संवाद करने का मौका देता रहा है? जी हां. इसका एक उदाहरण है यह विडियो जब 1984 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपयी देश के मतदाताओं को संबोधित कर रहे हैं.

सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक प्रसारकों जैसे ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर राजनितिक दलों और उनके उम्मीदवारों के चुनावी बयानों को संतुलित तरीके से प्रसारित करने की विशेष जिम्मेदारी है. यह आमतौर पर स्वीकार किया जाता है कि सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्टेशनों का दायित्व है कि वे पार्टियों और उम्मीदवारों को समान आधार पर मतदाताओं के साथ सीधे संवाद करने की अनुमति दें. इसके विपरीत निजी मीडिया संसथान उन पार्टियों और उम्मीदवारों के बयान प्रकाशित करना या प्रसारित करने को प्राथमिकता देते हैं जिसे वे पसंद करते हैं. निजी क्षेत्र में मीडिया के दुरुपयोग की गुंजाइश दिखती है क्योंकि ऐसा दुरुपयोग रोकने के लिए कोई खास नियम लागू नहीं हैं.

दूसरी तरफ सार्वजनिक प्रसारकों को एक नियमों की सूची के अनुसार चलना होता है जिसका उद्देश्य है सत्तारूढ़ दल या किसी भी अन्य राजनीतिक दल को अनुचित वरीयता देने से बचना. इसके अनुसार दूरदर्शन इत्यादि को सभी दलों और उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करना होता है. इन नियमों को AIR कोड (ऑल इंडिया रेडियो कोड) के रूप में जाना जाता है.

इस कोड में चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देशों को शामिल किया जाता है.

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