घरेलु नौकरों की बढ़ती आबादी और बढती उनकी यातनाएं

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सौतुक डेस्क/

पिछले सप्ताह एक 13 से 14 सालक की लड़की  जो घरेलू नौकर के तौर पर काम करती थी, अपने बिल्डिंग के ग्यारहवीं मंजिल से कूद गई. ऐसा माना जा रहा है कि वह लड़की अपने मालकिन से बच कर भाग निकलने के क्रम में यहाँ से कूदी. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. इस मामले में आरोपी 22 साल की एक इंजिनीरिंग की छात्रा है जो मानव रचना विश्वविद्यालय से पढ़ाई  करती है. पुलिस ने उसे  हिरासत में ले लिया है.

आपको बता दें कि बुधवार की रात स्थानीय लोगों ने इस बाबत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. तत्पश्चात बाल कल्याण समिति के लोगों की उपस्थिति में उस नाबालिग लड़की का बयान दर्ज हुआ . बृहस्पतिवार को पुलिस ने  किशोर न्याय (बाल देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 धारा 79 के तहत इस मामले में केस दर्ज कर लिया.

इसी बीच, उस लड़की को बाल संरक्षण गृह में भेज दिया गया है. पुलिस उस लड़की के माता-पिता की तलाश में लगी हुई है. इनके अनुसार लड़की अपने घर का पता नहीं बता पा रही है. घर का पता पूछने पर सिर्फ पटना बताती है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार आरोपी का नाम स्नेहा है. वह भी पटना की रहने वाली है और उसके पिता खनन का काम करते हैं. आरोपी के पिता ने अपने ही खान में काम कर रहे एक मजदूर की नाबालिग बेटी को अपनी बेटी के यहाँ बतौर घरेलु नौकर रखवाया था.

आरोपी के साथ यह बच्ची फरीदाबाद करीब दो साल पहले आई थी और जैसा कि उसने बाल कल्याण समिति और अन्य लोगों को बताया है, तभी से उसे बात-बेबात बेरहमी से मारा-पीटा जाता है.

एक्सप्रेस की खबर के अनुसार उस बच्ची ने बताया है कि उसको पाईप से मारा जाता था. जब उससे कोई गलती हो जाती थी तो उसके पीठ पर गरम पानी फेंक दिया जाता था. बच्ची के शरीर पर घाव और जलने के निशान मौजूद थे.

बुधवार को वह बच्ची ग्रिल के सहारे भागना चाहती थी जब उसको लड़की ने पकड़ लिया और बाल पकड़ कर खींच रही थी. इसी खींचतान में लड़की ग्यारहवें तल से गिर गयी. संयोग ही था कि वह ग्यारहवें तल और दसवें तल के बीच लगी जाली में उलझ गयी और दसवें तल पर चली गई.

 

आर्थिक सुधार के बाद दस सालों में बढ़ी घरेलू नौकरों की संख्या (लाख में)

घरेलु नौकर और बदतर होती स्थिति

डाटा जर्नलिज्म करने वाली वेबसाइट इंडिया स्पेंड से बात करते हुए तृप्ति लाहिरी ने बताया कि भारत में आर्थिक सुधारों के बाद इस पेशे में बहुत बड़ा उछाल आया. महज़ दस सालों में घरेलू नौकरों की संख्या में 120 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई. तृप्ति ने एक पुस्तक लिखी है, मेड इन इंडिया. इनके अनुसार 1991 में जहां 7.4 लाख घरेलू नौकर हुआ करते थे वहीँ 2001 में इनकी संख्या बढ़कर 16.2 लाख हो गई. इनमें से दो-तिहाई महिलायें हैं.

नौकरानियां सामान्यतः गरीब राज्यों से जैसे झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और असम इत्यादि से आती हैं. इनमें अधिकाँश बच्चियां होती हैं जिनके साथ गाली-गलौज, शारीरिक, मानसिक उत्पीड़न  सामान्य बात है. ऐसा ही एक हादसा हाल में नॉएडा में हुआ था जहां अल्पसंखयक समुदाय से आने वाली एक नौकरानी ने उत्पीड़न की वजह से विरोध किया तो दंगे जैसी स्थिति बन गई थी. यह घटना जुलाई की है.

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