डेरेक ओ ब्रायन की पत्नी को प्रधानमंत्री के मेल जाते हैं, क्या आपको भी आते हैं ये मेल?

0

उमंग कुमार/

“मेरी पत्नी अमेरिका में है और उसके पास प्रधानमंत्री के मेल आते हैं। मुझे नहीं मालूम कि सरकार के पास उसका मेल आईडी कैसे गया,” ये बयान तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन का है। उन्होंने हाल ही में संसद में बोलते हुए ये बात कही।

क्या आपके पास भी प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का बही-खाता देता हुआ मेल आता है। अगर जवाब ‘हाँ’ है तो ये सवाल आप भी पूछ सकते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय में आपका मेल आईडी कैसे गया। क्या सरकार भी थोकभाव में आपका डेटा खरीद रही है, जैसे निजी कंपनियां अपने प्रचार के लिए करती हैं? कौन है जिसने हमलोगों की मेल आईडी सरकार को बेची है? और अगर सरकार ही डेटा के इस तरह के खरीदफरोख्त में शामिल है तो आप शिकायत करने किसके पास जाएंगे?

दूसरा सवाल है कि क्या देश का प्रधानमंत्री कार्यालय भी अब स्पैम भेजेगा? अगर आप थोड़ी बहुत पड़ताल करेंगे तो पाएंगे कि स्पैम का मतलब होता है, ‘इंटरनेट के द्वारा सामन्यतः बड़े पैमाने (समूह में) पर भेजा गया अप्रासंगिक और अनचाहा मेल। इसका मुख्य उद्देश्य प्रचार, वायरस फैलान या ठगी होता है।’

वर्तमान सरकार के पास जनता तक अपनी बात पहुंचाने के कम तरीके मौजूद हैं क्या कि इन्हें स्पैम का सहारा लेना पड़ रहा है

क्या प्रधानमंत्री कार्यालय को इस कटेगरी में शामिल होना शोभा देता है? दूसरे, वर्तमान सरकार के पास जनता तक अपनी बात पहुंचाने के कम तरीके मौजूद हैं क्या कि इन्हें स्पैम का सहारा लेना पड़ रहा है। इनके पास अपनी खुद की टीम और वेबसाइट है जिसे पीआईबी कहते हैं। इससे अलग प्रधानमंत्री की खुद की वेबसाइट है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम तो है ही जिसके तहत मोदी रेडियो के माध्यम से जनता से संवाद करते हैं। फिर मेन स्ट्रीम मीडिया का भी इस्तेमाल इसी उद्देश्य से किया जा रहा है। ये मीडिया भी सरकार की शिकायत नहीं कर सकती। इनको भी बस गुणगान करने की ही इजाज़त है। हाल ही में एबीपी न्यूज़ चैनल से तीन बड़े पत्रकारों की विदाई हो गयी सिर्फ इसलिए कि ये ख़बर को खबर की तरह बरतना चाहते थे।

तो इतने के बाद सरकार को इस अनैतिक तरीके का इस्तेमाल क्यों करना पड़ रहा है? खासकर जब देश में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकारों में शामिल कर लिया गया है तो प्रधानमंत्री कार्यालय का इस तरह स्पैम भेजना क्या संदेश देता है?

प्रधानमंत्री कार्यालय का अनुसरण करते हुए अब तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी ऐसे स्पैम आने लगे हैं।

यही होता है। शीर्ष पर बैठा व्यक्ति बाकी समाज के लिए मानक तैयार करता है। खासकर भारतीय समाज मे इसके मायने हैं। जहां लोग कुछ खास नेताओं के पढ़े-लिखे होने, नैतिक मूल्यों पर उच्च व्यवहार करने इत्यादि का उदाहरण देते हैं। लेकिन अभी तो देश का प्रधानमंत्री ही एक निजी कंपनी के सीईओ के जैसा व्यवहार कर रहा है तो बांकी के लोग भी धीरे-धीरे इसका अनुसरण करने लगेंगे।

कुछ लोगों का तर्क है कि इसमें कुछ बुरा नहीं है अगर प्रधानमंत्री कार्यालय से सप्ताह में एक दो मेल आ जा रहे हैं। इन लोगों को कौन समझाए कि ये तो अभी शुरुआत है। जब सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय और कांग्रेस की तरफ से ही स्पैम भेजा जा रहा है। बहुत जल्दी इनका अनुसरण करते हुए सारे मंत्री, सांसद, विधायक हमलोगों का डेटा निजी कंपनियों से खरीदेंगे और हमें अपनी उपलब्धियां  बताते फिरेंगे।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here