यह रहा सुशासन बाबू के तेरह साल का स्कोर कार्ड

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उमंग कुमार/

जब नितीश कुमार 2005 में बिहार के सत्ता में आये थे तो पिछड़े बिहार को सुशासन के बदौलत आगे ले जाने का वादा किया था. तेरह साल गुजरने को हैं और लगता है बिहार नेताओं द्वारा ठगे जाने के लिए अभिशप्त है. पिछले सप्ताह नीति आयोग ने विभिन्न मुद्दों पर विकास सम्बंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की उसमें बिहार और उत्तर प्रदेश अपने नेताओं के कुकृत्य की वजह से निचले पायदान पर विराजमान हैं. इन विकास के मुद्दों पर बिहार को सौ में 48 अंक मिले हैं. लेकिन अगर और बारीकी से इसकी पड़ताल की जाए तो अंदाज़ा लगेगा कि बिहार प्रत्येक मूलभूत मुद्दे पर पूरे देश में सबसे पीछे है. यह तब है जब नीतीश कुमार 13 साल सत्ता में रहने के बाद सुशासन बाबू के तौर पर अपनी ब्रांडिंग कर चुके हैं.

नीति आयोग की यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goal- SDG) की तरफ राज्यों की वर्तमान स्थिति और किये जा रहे प्रयास को आंकने के उद्देश्य से तैयार की गई है. सतत विकास लक्ष्य 2015 में सयुंक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित किया गया था जिसे पूरे विश्व समुदाय को 2030 तक में हासिल कर लेना है.

इस रिपोर्ट में बिहार को 48, उत्तर प्रदेश को 42 अंक दिया गया है. सबसे अधिक अंक पाने वाले राज्य हिमाचल प्रदेश को 69 अंक दिया गया है. पर शुरूआती लक्ष्य जो राज्य में इंसानी जीवन के हाल बयान करते हैं उसपर बिहार की स्थिति काफी निराशाजनक है.

नीति आयोग के आंकड़े पर आधारित

इस SDG का पहला लक्ष्य है गरीबी दूर करना. इस मोर्चे पर बिहार को 45 अंक मिले हैं सबसे  अधिक अंक तमिलनाडु (76) के खाते में हैं. बिहार से नीचे तीन राज्य हैं. मध्य प्रदेश (44), मणिपुर (44) और झारखण्ड (37). लेकिन ये तीनों राज्य ऐसे हैं जहां आदिवासियों की संख्या अधिक है और आदिवासियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति अन्य समुदाय के लोगों से बुरी है. तेंदुलकर कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 में भारत की करीब 22 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे थे. सात राज्य और पांच केंद्र शासित राज्यों ने अपने वहाँ से पूरी तरह गरीबी मिटा दी है.

दूसरा लक्ष्य है भूखमरी मिटाना. इस लक्ष्य के अनुसार दुनिया को यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोगों को समुचित पौष्टिक भोजन मिले. खासकर वंचित समाज को और उनको जो किसी ख़ास आपदा/विपदा में फंसे हों. इसमें बच्चों सहित समाज के सभी लोगों को पोषण सहित साल भर समुचित भोजन उपलब्ध कराने की बात की गई है. इसमें भी बिहार, 39 के स्कोर के साथ नीचे से दूसरे पायदान पर है. बिहार से नीचे सिर्फ झारखण्ड है जिसका स्कोर 35 है. पुनः यह बात दोहराई जा रही है कि झारखण्ड आदिवासी-बहुल राज्य है. इस श्रेणी में 80 अंक के साथ गोवा प्रथम स्थान पर है.

लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य तीसरा है. इसमें भी बिहार 40 के स्कोर के साथ रेड जोन में हैं. इस श्रेणी में सात राज्य बिहार से भी पीछे हैं जिनमें झारखण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, नागालैंड, असम और उत्तर प्रदेश हैं. लेकिन इनमें अगर मध्य प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो किसी राज्य को लागातार तीन बार एक मुख्यमंत्री नहीं मिला और मध्य प्रदेश में आदिवासियों की संख्या अधिक होने और उनके पिछड़े होने की वजह से राज्य के रैंकिंग नीचे रहने की सम्भावना है. इस मोर्चे पर केरल 92 के स्कोर के साथ प्रथम स्थान पर है.

चौथा लक्ष्य है सभी लोगों को गुणवत्ता के साथ शिक्षा उपलब्ध कराना. इसमें बिहार 36 अंक के साथ सबसे निचले पायदान पर है. नागालैंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश सब बिहार से बेहतर स्थिति में हैं. यह ध्यान रहे कि भारत में शिक्षा नागरिकों को एक बुनियादी अधिकार के तौर पर प्राप्त है. इस श्रेणी में भी केरल 87 अंक के साथ प्रथम स्थान पर है.

पांचवां लक्ष्य है जेंडर इक्वलिटी यानी समाज में स्त्री-पुरुषों को बराबर की स्थिति होना. इसमें भी 24 के स्कोर के साथ बिहार सबसे पिछड़ा है. वैसे इस श्रेणी में अधिकतम स्कोर 50 ही है जो केरल और सिक्किम को मिला है. आयोग ने समाज में महिलाओं की स्थिति समझने के लिए कई मुद्दों की जांच परख की है जिसमें जन्म के समय लिंगानुपात, कार्य क्षेत्र में स्त्री और पुरुषों को मिलने वाली मजदूरी और तनख्वाह, कितनी प्रतिशत महिलाओं के साथ हिंसा हुआ, स्थानीय चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व, बाहर काम पर जाने वाली महिलाओं का प्रतिशत इत्यादि शामिल है. यहाँ भी केरल 50 अंक के साथ शीर्ष पर है.

मजेदार यह है कि इस बुरे स्कोर कार्ड के साथ नितीश  कुमार को एक साल में लोकसभा चुनाव और दो साल के अन्दर विधानसभा चुनाव में उतरना है.

लक्ष्य छः है पीने के लिए स्वच्छ जल की उपलब्धता और साफ़ सफाई. यहाँ भी बिहार 31 स्कोर के साथ सबसे नीचले पायदान पर है. झारखण्ड और उत्तर प्रदेश 51 और 55 अंक के साथ काफी आगे हैं. इस श्रेणी में गुजरात को 100 और छत्तीसगढ़ को 98 अंक हासिल है.

नीति आयोग ने कुल सत्रह लक्ष्यों में से तेरह लक्ष्यों का ही अध्ययन किया है क्योंकि बाकी के चार लक्ष्यों पर केंद्र सरकार को कार्य करना है. इन तेरह में छः लक्ष्यों पर बिहार की स्थिति नाजुक है. अन्य सात लक्ष्य उर्जा, आर्थिक विकास इत्यादि को लेकर है. इन लक्ष्यों पर भी बिहार की स्थिति कोई सम्मानजनक नहीं है.

मजेदार यह है कि इस बुरे स्कोर कार्ड के साथ नितीश  कुमार को एक साल में लोकसभा चुनाव और दो साल के अन्दर विधानसभा चुनाव में उतरना है. देखना यह है कि लोग सुशासन बाबू के ऐसे कमजोर प्रदर्शन करने के बाद उन्हें आगे मौका देते हैं या बाहर का रास्ता दिखाते हैं.

 

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