नोटबंदी ने बनाया 50 लाख लोगों को बेरोजगार: रिपोर्ट

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शिखा कौशिक/

यह विडम्बना ही है कि एक दिन पहले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डीडी न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में कहते हैं कि जो लोग भ्रष्टाचार में लिप्त थे वो आज भी नोटबंदी का रोना रो रहे हैं और उसके ठीक एक दिन बाद एक रिपोर्ट आती है कि इस नोटबंदी की वजह से करीब 50 लाख लोगों को बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ी.

मंगलवार को प्रकाशित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 और 2018 के बीच लगभग 50 लाख लोगों से रोजगार छिन गया. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरियों में गिरावट की शुरुआत 2016 में सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद शुरू हुई.

इस ‘स्टेट ऑफ़ वर्किंग इंडिया 2019’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बेरोजगारी 2011 से लागातार बढ़ रही थी और नोटबंदी की वजह से यह गिरावट तेज हो गई. देश में बेरोजगारी दर 2018 में लगभग 6 प्रतिशत  आंकी गई थी जो कि 2000 और 2011 के बीच दोगुनी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान बेरोजगारी की सबसे अधिक मार उच्च शिक्षित और 20 और 24 वर्ष की आयु के लोगों को झेलना पड़ रहा हैइस आयु वर्ग में शहरी पुरुषों की आबादी 13.5 प्रतिशत है लेकिन इस वर्ग के 60 प्रतिशत लोग बेरोजगार हैं

इस रिपोर्ट के लिए शोधकर्ताओं ने CMIE-CPDX  की निगरानी में भारतीय अर्थव्यवस्था या के वास्तविक स्थिति को समझने के लिए किया गया उपभोक्ता पिरामिड सर्वेक्षण का इस्तेमाल किया गया है. जनवरी में लीक हुए राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSSO) ने भी कहा था कि अभी देश में बेरोजगारी पिछले 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ रही है. इसके अनुसार देश में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत पहुँच गई है.

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान बेरोजगारी की सबसे अधिक मार उच्च शिक्षित और 20 और 24 वर्ष की आयु के लोगों को झेलना पड़ रहा है. इस आयु वर्ग में शहरी पुरुषों की आबादी 13.5 प्रतिशत है लेकिन इस वर्ग के 60 प्रतिशत लोग बेरोजगार हैं.

इनके अतिरिक्त कम शिक्षित (और संभावित, अनौपचारिक) श्रमिकों के बीच भी बेरोजगारी बढ़ी है और इनके लिए भी नोटबंदी के बाद काम करने के अवसर कम हुए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार काम करने की इच्छुक महिलायें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

CMIE-CPDX एक राष्ट्रीय प्रतिनिधि सर्वेक्षण है जिसमें लगभग 1,60,000 परिवार और 5,22,000 लोगों को शामिल किया जाता है. यह हर साल जनवरी से शुरू होता है और तीन फेज में (चार महीने में एक) पूरा किया जाता है.

इस रिपोर्ट के अनुसार इस सदी के पहले दशक में बेरोजगारी दर 2-3 प्रतिशत रही और 2011 से बढ़नी शुरू हुई. वर्ष 2015 में बेरोजगारी दर बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई और 2018 में 6 प्रतिशत से भी अधिक हो गई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों में भारतीय श्रम बाजार में भारी उथल-पुथल हुआ है जिसकी मार देश के युवा झेल रहे हैं, और अगर ऐसे में प्रधानमंत्री इनको भ्रष्ट कहकर अपनी गलती छिपाने की कोशिश कर रहे हैं  तो देश के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है.

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