मजदूरी तय करने के लिए समिति ने कैलोरी की मात्रा कम करने को कहा

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सौतुक डेस्क/

श्रम और रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की है कि न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए कैलोरी सेवन की तय मात्रा को 2,700 से घटाकर 2,400 कर दिया जाए. वर्तमान में न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए 2700 कैलोरी को मानक माना जाता है. हालांकि, समिति ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए प्रोटीन और वसा को भी शामिल किया है जो पहले नहीं था. पहले सिर्फ कैलोरी को ही मानक के तौर पर देखा जाता था.

पिछले साल, 17 जनवरी, 2018 को गठित सात-सदस्यीय समिति ने अपने रिपोर्ट में 375 रुपये की न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश की है. इस राशि को सुनिश्चित करने के लिए समिति ने न्यूनतम मजदूरी तय करने की पिछली नीति में कई जरुरी बदलाव किए हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है भोजन का सेवन. इसने कैलोरी की मात्रा को 2700 से घटाकर 2400 कर दिया है लेकिन प्रोटीन और वसा को भी ध्यान में रखने की बात की है. यदि इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है, तो न्यूनतम वेतन की गणना 2,400 कैलोरी, 50 ग्राम प्रोटीन और 30 ग्राम वसा (प्रति वयस्क व्यक्ति, प्रति दिन) को ध्यान में रख कर न्यूनतम मजदूरी तय की जायेगी.

राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करने की कार्यप्रणाली का निर्धारण करने वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में तर्क दिया है कि पहले लोगों के काम करने का तरीका अलग था. शारीरिक श्रम अधिक करना होता था पर वर्तमान समय में यह बदल रहा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम करने वाले लोगों में कमी आई है और मध्यम और श्रमहीन व्यवसायों में काम करने वाले लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है.

फोटो: साभार विकिमिडिया कॉमन्स

इन्ही तर्कों के आधार पर समिति ने कहा है कि दैनिक मजदूरी के लिए प्रति दिन के हिसाब से आवश्यक कैलोरी को भी कम किया जाना चाहिए. दैनिक वेतन के लिए 2,700 कैलोरी का विचार जुलाई 1957 में आयोजित भारतीय श्रम सम्मेलन के 15 वें सत्र की पांच सिफारिशों पर आधारित है. इसी सत्र में इसकी सिफारिश की गई थी.

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर काम करने वाली वंदना प्रसाद का कहना है कि 50 ग्राम प्रोटीन एक स्वागत योग्य कदम है. लेकिन उन्होंने कैलोरी में कमी करने पर सवाल उठाया और कहा कि यह मजदूरों के लिए काफी कम है. खासकर देश में व्याप्त कुपोषण को ध्यान में रखते हुए अगर रोजमर्रा के लिए जरुरी कैलोरी पर बात की जाए, तो समिति का इसको घटाकर 2,400 करने का फैसला सरासर गलत है.

उन्होंने कहा कि अधिक श्रम करने वाले पुरुष को लगभग 3,500 किलो कैलोरी की आवश्यकता होती है. वहीं, एक महिला मजदूर को रोज 2,850 किलो कैलोरी की आवश्यकता होती है. वंदना आगे कहती हैं कि कम श्रम वाले काम में भी पुरुषों को लगभग 2,700 कैलोरी और महिलाओं को 2,230 कैलोरी की आवश्यकता होती है.

दैनिक वेतन के लिए 2,700 कैलोरी का विचार जुलाई 1957 में आयोजित भारतीय श्रम सम्मेलन के 15 वें सत्र की पांच सिफारिशों पर आधारित है

उनका कहना है कि न्यूनतम मजदूरी कमजोर लोगों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है न कि मोटे होते मध्यम वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर. इसलिए समिति की अनुशंसा एकदम गलत है.

विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित रिपोर्ट में कुछ अन्य बदलावों की भी बात की गई है. इसमें स्थानीय आवश्यकता और सामाजिक-आर्थिक और श्रम बाजार संदर्भों के अनुरूप देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी शामिल हैं। इससे पहले, अखिल भारतीय स्तर पर एकल राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी थी.

समिति ने दैनिक मजदूरी तय करने के लिए परिवार इकाई में बदलाव की भी सिफारिश की है. पहले, प्रति परिवार तीन इकाइयों पर विचार किया जा रहा था जिसमें पति, पत्नी और दो बच्चे शामिल हैं. अब, न्यूनतम मजदूरी की गणना के लिए समिति ने इसे 3.6 उपभोग इकाइयों में बदल दिया है.

इन तथ्यों के आधार पर, समिति ने जुलाई 2018 तक भारत के लिए 375 रुपये प्रतिदिन के रूप में राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन की सिफारिश की है. यह क्षेत्रों, कौशल, व्यवसायों और ग्रामीण-शहरी स्थानों के बावजूद 9,750 रुपये प्रति माह के बराबर है. इससे पहले, न्यूनतम दैनिक वेतन के लिए कैलोरी सेवन को आधार बनाने पर विचार किया गया था. 1996 में, न्यूनतम दैनिक वेतन 35 रुपये निर्धारित किया गया था. यह दर धीरे-धीरे मुद्रास्फीति को देखते हुए बढ़ाया गया है और 1 जून, 2017 को यह 176 रुपये प्रति दिन था.

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