गुजरात में फिर खिल रहा कमल, भाजपा सरकार बनाने की तरफ अग्रसर

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सौतुक डेस्क/

देश के आगे की राजनीति के मद्देनजर अहम् माने जाने वाले गुजरात विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जीत की तरफ अग्रसर है. पिछले 22 सालों से इस राज्य पर शासन कर रहे इस दल को पूर्ण बहुमत मिलने की सम्भावना है. ताजा रुझान के हिसाब से देखें तो भाजपा करीब 105 सीट पर बढ़त बनाए हुए है जबकि सरकार बनाने के लिए महज 92 सीट की जरुरत है.

लगभग सारे एग्जिट पोल ने ही भाजपा को बहुमत दिलाई थी, बावजूद इसके कांग्रेस ने गुजरात में 22 साल बाद सत्ता में वापसी का दावा किया था.

इस राज्य के 182 विधानसभा सीटों के लिए दो चरण में चुनाव हुए थे. इसी महीने के 9 और 14 तारीख को दो चरणों में संपन्न हुए मतदान में राज्य की करीब 3 करोड़ जनता ने अपने मत का इस्तेमाल किया था

सनद रहे कि पूरे देश की नज़र गुजरात चुनाव की तरफ लगी हुई थी क्योंकि नरेन्द्र मोदी इस राज्य से जुड़े हुए हैं और बतौर मुख्यमंत्री इस राज्य का अद्भूत विकास करने का दावा करते रहे हैं. पूरे देश में इन्होने इसी को विकास का मॉडल कहकर लोकसभा चुनाव जीता था.

इस राज्य के 182 विधानसभा सीटों के लिए दो चरण में चुनाव हुए थे. इसी महीने के 9 और 14 तारीख को दो चरणों में संपन्न हुए मतदान में राज्य की करीब 3 करोड़ जनता ने अपने मत का इस्तेमाल किया था. पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 25 लाख कम वोटर थे.

इसके पहले कांग्रेस से गुजरात के मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने जातिगत समीकरण का इस्तेमाल करते हुए अस्सी के दशक में कुल 182 सीट में से 149 पर जीत दर्ज की थी. लेकिन नब्बे के दशक आते-आते गुजरात की राजनीति जातिगत समीकरण की जगह धार्मिक ध्रुवीकरण की तरफ घूम गया. और नरेन्द्र मोदी जान-बूझकर इस बार फिर धार्मिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश करते दिखे.

इसके पहले कांग्रेस से गुजरात के मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने जातिगत समीकरण का इस्तेमाल करते हुए अस्सी के दशक में कुल 182 सीट में से 149 पर जीत दर्ज की थी

लेकिन तीन क्षत्रप जिसमें पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएसएस) के संयोजक हार्दिक पटेल, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेता अल्पेश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी भी जातिगत समीकरण को हवा देते दिखे और कांग्रेस ने इनका भरपूर साथ दिया.

इससे कम से कम इतना तो स्पष्ट है कि गुजरात में विकास का मुद्दा सिरे से नदारद रहा है और यहाँ तक नरेन्द्र मोदी जो और राज्यों में गुजरात को विकास का मॉडल बताते रहे हैं उन्होंने अपने खुद के राज्य में विकास शब्द से समानांतर दूरी बनाये रखी. यहाँ तक कि पहले दौर के चुनाव के एक दिन पहले तक भाजपा के पास घोषणापत्र नहीं था. आनन- फानन में चुनाव के पहले की शाम को देश की इस सबसे बड़ी पार्टी ने घोषणापत्र जारी किया.

इस चुनाव में राहुल गाँधी की बतौर कांग्रेस अध्यक्ष ताजपोशी भी हुई और राहुल गाँधी भाजपा के बनाये इमेज से बाहर आते दिखे और इस चुनाव में लगातार सक्रिय रहे.

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